तिघरा मराछी बांध पर जगह-जगह बने रेनकट्स और रैटहोल ।
रुद्रपुर। नदियों के जलस्तर के उतार-चढ़ाव के बीच बांधों की बदहाल हालात ने चिंता बढ़ा दी है। एकौना क्षेत्र के दोआबा के जर्जर बंधों की हालत देख लोग बाढ़ आने पर मंजर भयावह होने की आशंका में है। राप्ती और गोर्रा नदी के तटवर्ती बंधा रेनकट्स और रैट होल से छलनी हो गए हैं।
नदियों का जलस्तर बंधों के पास पहुंचा तो बंधे नदी के वेग को रोकने में अक्षम साबित होंगे। दोआबा वासी बरसात में भी बंधों के मरम्मत का काम पूरा नहीं होने पर सिंचाई विभाग की कार्य शैली पर सवाल उठा रहे हैं। राप्ती नदी पर स्थित तिघरा मराछी बंधा जगह-जगह पर जर्जर हो चुका है। बंधे पर मराछी, एकौना, भेड़ी, कोड़र, माझा नरायन और करहकोल गांव के पर रेन कट्स बने हुए है। बंधे पर बड़े-बड़े रैट होल करीब तीन माह से बने हुए हैं। बारिश शुरू होने के बाद बांधों की जर्जर हालत के कारण बाइक से भी गुजरना मुश्किल हो गया है।
नगवा छपरा बांध पर साही की मांद बनने से बंधा धंस रहा है। भिरवा, सचौली पटवनिया गांव के पास बंधे की हालत दयनीय देख ग्रामीणों में जलस्तर बढ़ने पर बांधा धंसने का भय बना है। दोआबा वासी वशिष्ठ यादव, सिंकदर यादव, राम प्रवेश साहनी, हरिकिशुन, दीनदयाल आदि ने कहा कि बंधे पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। सिंचाई विभाग संभावित बाढ़ को लेकर सब दुरुस्त रहने का दावा कर रहा है, जबकि धरातल पर स्थिति चिंताजनक बनी है।
बरसात का मौसम शुरू होने के बाद भी बंधे दुरुस्त नहीं कराए गए। जिम्मेदार अधिकारियों ने कछार और दोआबा के 116 गांवों को डूबाने की तैयारी कर ली है। इस बावत सिंचाई विभाग के अवर अभियंता हिमांशु कुमार ने कहा कि बंधों के रेन कट्स भरे जा रहे हैं। सिंचाई विभाग लगातार बांधों पर काम कराने में जुटा है।