बरहज। नगर के गौरा स्थित नर्वदेश्वर और कुटी घाट पर मंगलवार को तीनों दोस्तों के शव मिले। चार से पांच घंटे के अंतराल में रणजीत, विवेक और चंद्रशेखर का शव दिखाई दिया। जानकारी होने पर गांव के लोग नदी तट पर पहुंच गए। पुलिस ने तीनों साथियों के शवों को कब्जे में ले लिया। तीनों का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने तक लोग नदी तट पर जमे रहे।
सोमवार को सरयू नदी के नर्वदेश्वर घाट पर लहछुआं गांव के कुछ युवाओं के साथ रणजीत पुत्र अशोक, विवेक पुत्र बेचन, चंद्रशेखर पुत्र कोमल और गोरखपुर के चौरीचौरा निवासी गांगुली मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा के लिए जल भरने आये थे। जहां पैर फिसल जाने के कारण रणजीत, विवेक, चंद्रशेखर और गांगुली डूबने लगे।
चारों को डूबता देख लोग शोर मचाने लगे। किसी तरह लोगों ने बांस के सहारे गांगुली को बचा लिया, लेकिन रणजीत, विवेक और चंद्रशेखर नदी में लापता हो गए। मंगलवार को दिन में करीब 10 बजे नर्वदेश्वर घाट पर रणजीत, जबकि एक बजे के करीब कुटी घाट के निकट विवेक और चंद्रशेखर का शव उतराता मिला। तीनों के शव मिलने की जानकारी होने पर नदी घाट पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
नदी तट पर रोना-पिटना मच गया। जानकारी होने पर एसडीएम विपिन कुमार द्विवेदी, सीओ, इंस्पेक्टर राहुल सिंह पहुंच गए। इंस्पेक्टर राहुल सिंह ने बताया कि तीनों शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
शवों का किया अंतिम संस्कार ः बरहज संवाद के अनुसार कटइलवा स्थित मुक्तिपथ पर देर शाम तीनों साथियों का अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ तीनों साथियों की जलती चिताओं को देख गांव के लोग रो पड़े। शाम को तीनों का शव गांव पहुंचा। दरवाजों पर लोगोें की भीड़ जुट गई।
स्थापित करने से पूर्व ही विसर्जित की गई प्रतिमा ः बरहज संवाद के अनुसार लहछुआं गांव में प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित किया गया था। पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह था। लेकिन उन्हें क्या पता था कि मां को इस बार कुछ और ही मंजूर है। लोगों ने दुर्गा प्रतिमा का स्थापना से पूर्व ही विसर्जन कर दिया।