बरहज। सरयू नदी शुक्रवार को खतरे के निशान 66.50 से एक मीटर ऊपर 67.50 मीटर पर बहने लगी है। इससे विशुनपुर देवार के 12 मजरे बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।। सरयू के उफान से तटवर्ती गांवों के लोग डरे-सहमे हुए हैं। उन्हें 1998 का मंजर याद आने लगा है।
पिछले 24 घंटे में सरयू के जलस्तर में इजाफा से विशुनपुर देवार के स्कूलहिया, कत्लहिया, चौहान बस्ती, लोहार टोला, जरलहवा, पुरानी और नई अनुसूचित जाति बस्ती, पश्चिम टोला के अलावा 12 मजरे चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। उधर राप्ती के उफनाने से टापू बने भदिला प्रथम गांव के लोगोंं की दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। बिनोवापुरी गांव के पास कपरवार-रुद्रपुर मार्ग तक राप्ती का पानी पहुंच गया है।
ग्रामीण रमाशंकर यादव, ओमप्रकाश यादव, छोटेलाल, मंजनाथ, विनय यादव, गरजू, अमरनाथ आदि का कहना है कि पिछले दिनों सरयू के जलस्तर में आई नरमी के कारण नदी के पीछे हटने पर राहत महसूस हुआ था मगर नदी का उग्र तेवर देखकर कुछ भी कहना संभव नहीं है।
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विशुनपुर देवार में सात और भदिला प्रथम में लगाई गई पांच नाव
बाढ़ के पानी से विशुनपुर देवार और भदिला प्रथम गांव का संपर्क मार्ग टूट गया है। परसियां देवार में पीडब्ल्यूडी बांध और कटइलवा-कपरवार संगम तट, बिनोवापुरी-महेन नवीन तटबंध के अलावा मोहरा-समोगर-केवटलिया बांध पर नदियों के पानी का दबाव बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से विशुनपुर देवार में सात, जबकि भदिला प्रथम गांव में पांच नाव लगाई गई है। परसियां देवार के लोग दो नाव की मांग कर रहे हैं।
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कोट-
सरयू नदी के जलस्तर में लगातार बढ़त हो रही है। बंधों की निगरानी कराई जा रही है।
उपेंद्र कुमार, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड