इस बीच कोतवाल हमारे लड़कों को थाने बुलाकर रजिस्ट्री वापस करने का दबाव बनाने लगे। जब बात नहीं मानी तो मेरे बड़े बेटे कृष्णकांत त्रिपाठी जो देसहीं देवरिया में प्राथमिक स्कूल में टीचर हैं उन पर और उनकी पत्नी सोनू त्रिपाठी जो गृहिणी हैं पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई कर दी। जिस पर अपर पुलिस महानिदेशक ने तीन के अंदर एएसपी को जांच कर आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
जांच में कोतवाल सहित चार पुलिस कर्मी दोषी पाए गए। इस पूरे प्रकरण पर नजर दौड़ाई तो दोनों तरफ से ही पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो रहा है, क्योंकि विपक्षी का भी केस दर्ज न होने पर उसे न्यायालय जाना पड़ा। इसके बाद मारपीट, लूट सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज हुआ। इसके बाद पुलिस एक तरफा को ही गुंडा बना दी।
शिक्षक कृष्णकांत तिवारी ने कहा कि प्राथमिक विद्यालय देसहीं देवरिया में शिक्षक व पीड़ित कृष्णकांत त्रिपाठी ने बताया कि मेरे साथ कोतवाल गोपाल पांडेय अन्याय किया था। मेरे व मेरी पत्नी पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई जान बुझ कर किया था। इसकी सजा उनको मिली है।
सोनू त्रिपाठी ने कहा कि मैं गृहिणी हूं। लेकिन पुलिस ने मुझ पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई कर गलत किया। जबकि मेरे पति शिक्षक हैं। ऐसे लोगों पर जब इस तरह की कार्रवाई होगी तो लोगों का पुलिस से भरोसा उठ जाएगा।
एसपी संकल्प शर्मा ने कहा कि कोतवाल की कई मामलों में शिकायत मिली थी, जिसके कारण निलंबित कर दिया गया है। अन्य पुलिस कर्मी भी अपने दायित्वों का ठीक ढंग से निर्वहन नहीं कर रहे थे। गुंडा एक्ट वाले मामले की भी जांच की जा रही है।