आज से पांच मार्च तक चलेगा अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। देश को टीबी मुक्त बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके मद्देनजर जांच और इलाज पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत क्षय रोगियों के चिह्नीकरण के लिए शुक्रवार से क्षय रोगी खोजी अभियान (एसीएफ कैंपेन) शुरू होगा, जो पांच मार्च तक चलेगा। इसकी तैयारी कर ली गई है। टीमें घर-घर जाकर लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करने के साथ ही लक्षण के आधार पर मरीजों को तलाशेंगी।
सीएमओ डॉ. राजेश झा ने कहा कि जिले में चलने वाले क्षय रोगी खोजी अभियान में घर-घर जाकर टीम क्षय रोगियों की खोज करेगी। कुल 6.79 लाख लोगों में टीबी के लक्षणों की जांच की जाएगी। इसके लिए 171 टीम बनाई गई हैं। लक्षण मिलने पर टीम बलगम का नमूना लेकर जांच के लिए भेजेंगी। रोग की पुष्टि होने पर दो दिन के अंदर मरीज का उपचार शुरू हो जाएगा। रोग की पुष्टि होती है तो टीम को छह सौ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी ।
लक्षण दिखें तो जरूर कराएं जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी आने, शाम को बुखार होने, सीने में दर्द, बलगम के साथ खून आए, भूख न लगे और वजन घट रहा है, तो टीबी हो सकता है। किसी भी व्यक्ति में यह लक्षण दिखाई दें तो जांच कराए। उन्होंने बताया कि क्षय रोग माइक्रोबैक्टीरिया, ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है। यह रोग मुख्यत: फेफड़े में होता है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों दिमाग, हड्डी, ग्रंथियों व आंत में भी हो सकता है। रोगी के खांसने, छींकने, इधर-उधर खुली जगह पर बलगम थूकने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने से बीमारी हो सकती है।
जिला कार्यक्रम समन्यवक देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में 18 टीबी यूनिट हैं। इसमें से तीन नगरीय स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। जांच के लिए 31 माइक्रोस्कोपिक सेंटर हैं, जहां बलगम की जांच होती है। दो लेड माइक्रोस्कोप, दो सीबीनाट व छह ट्रूनाट मशीनें हैं। एक डीडीआरटीबी सेंटर है। इसमें चार बेड हैं। जनपद में 2700 क्षय रोगी हैं। उनका इलाज चल रहा है।