फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Deoria News: ओपीडी भवन में होगी टीबी की जांच, पीड़ितों को सहूलियत

Sun, 22 Dec 2024 01:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
विज्ञापन
विज्ञापन
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में क्षय रोग से पीड़ित मरीजों को जांच के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा। बलगम जांच केंद्र को पुराने भवन से नए ओपीडी में शिफ्ट कर दिया गया है। इससे मरीजों और तीमारदारों को जांच कराने में आसानी होगी। रिपोर्ट भी जल्द मिल जाएगी और इलाज में सहूलियत होगी। इतना नहीं ही जरूरत पड़ने पर यहां वार्ड में भर्ती कर उपचार भी किया जा सकेगा। टीबी रोग के उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में क्षय रोग के मरीजों के इलाज की सुविधा है। चेस्ट व टीबी रोग विभाग की ओपीडी है। इन दिनों यहां मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनुराग शुक्ला मरीजों का परीक्षण कर लक्षण मिलने पर जांच और इलाज कर रहे हैं। यहां बलगम जांच के लिए निशुल्क व्यवस्था है। इसके लिए अलग केंद्र है, जो पुराने भवन में घुसते ही स्थापित था। ओपीडी से मरीज को जांच के लिए भेजा जाता था, लेकिन दूरी होने के कारण मरीजों को समय लगता था और तलाशने के लिए भटकना पड़ रहा था। इसे देखते हुए डिग्जिनेटेड माइक्रोस्कोपिक सेंटर (डीएमसी) यानी बलगम जांच केंद्र को नए ओपीडी भवन में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। इसे प्रथम तल पर सीढ़ी व लिफ्ट से पहुंचने पर सामने के पहले कमरे में शुरू किया गया है। अब मरीज सीढ़ी से पहुंच सकता है और जो मरीज चलने में असमर्थ होगा वह व्हीलचेयर और स्ट्रेचर से भी लिफ्ट से आसानी से जांच केंद्र पर जा सकता है। यहां दो कर्मचारी तैनात किए गए हैं। केंद्र पर ट्रू नाॅट मशीन और माइक्रोस्कोप से जांच होती है। इसके केंद्र के शिफ्ट होने से मरीजों और तीमारदारों को सहूलियत हुई है।
विज्ञापन

ट्रू नॉट और माइक्रोस्कोप से होती है जांच
डीसीएम केंद्र पर ट्रू नॉट और माइक्रोस्पकोप से जांच होती है। काफी दिनों से खांसी, बुखार, वजन कम होने, शाम को बुखार आने, सीने में दर्द सहित अन्य लक्षण मिलने पर डॉक्टर बलगम जांच कराते हैं। सेंटर में माइक्रोस्कोप से मरीजों की स्क्रीनिंग की जाती है। इसमें मरीज के स्पाट व सुबह के बलगम की जांच होती है। एक एमएल बलगम में दस हजार से अधिक टीबी बैक्टीरिया की संख्या होने पर इस विधि से रोग की जानकारी होती है, जबकि ट्रू नॉट मशीन से टीबी के मरीजों का पालीमरेन चेन रिएक्शन (पीसीआर) जांच होती है। यह मशीन टीबी की बैक्टीरिया जांच के लिए उपयुक्त है। एक एमल बलगम में 130 बैक्टीरिया होने पर भी जांच में पता लग जाता है। हर मरीज की जांच में एक चिप की आवश्यकता होती है। जांच में पाजीटिव आने पर मल्टीड्रग रजिस्टेंश (एमडीआर) की जांच की जाती है। इससे पता चलता है कि मरीज सामान्य व गंभीर श्रेणी में है।
नए ओपीडी भवन में केंद्र शिफ्ट होने से मरीजों को आसानी, बढ़ी जांच
- मेडिकल कॉलेज के पुराने भवन से नए ओपीडी भवन में बलगम जांच केंद्र शिफ्ट होने के बाद जांच की संख्या बढ़ गई है। यहां इसे 16 दिसंबर को शुरू किया गया है। पहले मरीजों को केंद्र तक पहुंचने में दिक्कत होती थी। हर रोग करीब 15 से 20 मरीजों की जांच होती थी। अब संख्या बढ़ गई है और 30 से 40 जांच हो रही है। केंद्र के पास टीबी वार्ड भी है। यहां भर्ती मरीजों को दवा की सुविधा भी केंद्र से उपलब्ध है। जांच में पाजीटिव आने पर मरीज का नि:क्षय पोर्टल पर पंजीकरण भी केंद्र पर कर दिया जाएगा। इसके बाद शहरी क्षेत्र मरीजों को सरकार की ओर से मिलने वाली सारी सुविधा दी जा रही है। पंजीकृत मरीज को एक हजार रुपये प्रतिमाह पोषण भत्ता के रूप में भी मिलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें