बिना मास्टर प्लान के ही देवरिया शहर नया आकार ले रहा है। नगर पालिका परिषद देवरिया और विनियमित क्षेत्र के 74 गांवों में धारा-80 की स्वीकृति के बाद भी नक्शा नहीं बन पा रहा है, जबकि मजबूरी में लोग निर्माण भी करा रहे हैं। ऐसे लोगों को यह भय भी सता रहा है कि मास्टर प्लान का पालन कराने के दौरान उनके जीवन की गाढ़ी कमाई से बने मकानों पर जेसीबी न चल जाए।
1981 में बने मास्टर प्लान में 2001 तक डेढ़ लाख की आबादी के अनुमान से विकास का खाका खींचा गया था, लेकिन उसके बाद मास्टर प्लान संशोधित नहीं हुआ। पहले के मास्टर प्लान में शहर का आकार छोटा था और अब उस क्षेत्र में इक्का-दुक्का जमीन है, जहां निर्माण संभव है। नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय में दो दशक पुराने मास्टर प्लान में जिस स्थान पर जमीन का जो उपयोग दर्ज है, उसी के अनुसार नक्शा पास किया जा रहा है। यही कारण है कि शहर और विनयमित क्षेत्र में नक्शे नहीं बन पा रहे हैं।
पुराने शहर में जमीन नहीं बची है, तो लोग शहरी इलाके छोड़कर गांवों में मकान बना रहे हैं। खेतों में तेजी से प्लाटिंग हो रही है, लेकिन मकान निर्माण के लिए नक्शा नहीं बन पा रहा है। लोग धारा-80 के अंतर्गत एसडीएम के आदेश से कृषि भूमि को गैर कृषि घोषित करा रहे हैं। उसके बाद भी नक्शा नहीं बन रहा है। यही कारण है कि ज्यादातर लोग बिना नक्शे का आवेदन कराए ही निर्माण करा रहे हैं। नगर पालिका परिषद कार्यालय में एक साल में 322 लोगों ने आवेदन किया, जिसमें 110 लोगों के नक्शे स्वीकृत हुए। ये सभी स्थान पुराने शहर में हैं, जहां आवासीय निर्माण के लिए मंजूरी दी जा रही है।
मास्टर प्लान में होगा योजनाबद्ध विकास
मास्टर प्लान-2031 को शासन में भेजा गया है। इसमें योजनाबद्ध विकास होना है। प्लान में आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक एवं कृषि क्षेत्र घोषित होगा। कृषि क्षेत्र में कृषि से संबंधित निर्माण किए जा सकते हैं। जैसे पाॅली हाउस एवं बीज भंडार हो सकता है।
रास्ते का विवाद भी बढ़ा
अधिवक्ता अरविंद गिरी ने बताया कि नक्शा स्वीकृत नहीं होने के कारण जमीन के विवाद भी बढ़ रहे हैं। नए मास्टर प्लान में 30 फीट रास्ता होना चाहिए, जबकि प्रापर्टी डीलरों ने 12 फीट रास्ता छोड़ा है। इतने रास्ते में दोनाें ओर नाली निकल गई तो सड़क सकरी हो जाती है। कुछ मामलों में जमीन बेचने वालों ने दोनों ओर के खरीदारों को छह-छह फीट का रास्ता बेच दिया है। योजना बताई कि दोनों लोग छह-छह फीट जगह छोड़ेंगे तो 12 फीट रास्ता बन जाएगा।
इसमें एक खरीदार ने छह फीट दूसरी ओर छोड़ दी तो रास्ता छह फीट ही बचता है। ऐसे मामले ज्यादा आ रहे हैं। नियम के अनुसार जमीन की प्लाटिंग करने वाले व्यक्ति को 30 फीट रास्ता छोड़ना चाहिए और उसे नगर पालिका परिषद को समर्पित कर देना चाहिए। विक्रेता भले ही पूरी जमीन की कीमत लें, लेकिन रास्ता बेचना नहीं चाहिए।
निकाला जाएगा बीच का रास्ता
नगर पालिका अध्यक्ष अलका सिंह ने बताया कि मकान का नक्शा स्वीकृत नहीं होने के कारण लोगों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, और शहर का योजनाबद्ध विकास भी नहीं हो रहा है। इस मामले में जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जाएगी।
सभासद प्रियंका वर्मा ने दावा किया कि नगर पालिका परिषद बोर्ड की बैठक 22 फरवरी को होनी है। इसमें मकान के नक्शे का मुद्दा को उठाएंगी। इस मामले में सभासदों ने बैठक भी की थी, क्याेंकि यह बड़ी समस्या है।
अभियंता बृजेश यादव ने बताया कि मास्टर प्लान स्वीकृत नहीं होने के कारण जमीन का वर्गीकरण नहीं हो रहा है। इसी नियम के आधार पर नक्शा स्वीकृत नहीं किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि दो-तीन माह में मास्टर प्लान स्वीकृत हो जाएगा।
जबकि, सर्वेक्षक अवधेस लाल श्रीवास्तव ने बताया कि मकान निर्माण का नक्शा स्वीकृत नहीं होना शहर की सबसे बड़ी समस्या है। नक्शा स्वीकृत नहीं हो रहा है, इस कारण लोग आवेदन भी नहीं कर रहे हैं। शहर का बेतरतीब विकास हो रहा है।