देवरिया। सीमावर्ती इलाकों में बनने वाली मिठाइयों के लिए बिहार के गोपालगंज से मिलावटी देसी घी आ रहा है। पिछले साल गोरखपुर शहर में इसका नमूना जांच में फेल हुआ था। हालांकि, देवरिया में इसका नमूना अभी तक नहीं लिया गया है। यह घी ब्रांडेड कंपनियों के मुकाबले आधे दाम पर मिल रहा है। इसकी वजह से दुकानदार इसका अधिक उपयोग कर रहे हैं। इस घी में वनस्पति घी और ट्रांस फैट की अधिकता होती है, जो सेहत के लिए सही नहीं होता है।
खाद्य तेल के बजाय आजकल लोग देसी घी में बनी मिठाइयों की मांग करने लगे हैं। मिठाई की बड़ी दुकानों पर देसी घी से बनी मिठाइयों का रेट सामान्य से अधिक होता है। मिठाई कारीगर सुबाष बताते हैं कि शुद्ध देसी घी कंपनियां 800 से 900 रुपये प्रति किलोग्राम की दर घी बेचती हैं। जबकि स्थानीय ग्वाले 1000 से 1200 रुपये किलोग्राम के भाव से देसी घी बेचते हैं। गोपालगंज से सफेद रंग के डिब्बों में बिना किसी स्टीकर के आने वाली देसी घी 450 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत में मिल रहा है। इस घी को बेचने वाले धंधेबाज दुकानदारों को यह बताते हैं कि यह दूध की छाली को गरम कर मशीन से तैयार होता है, इसलिए सस्ता है। हालांकि ऐसा होता नहीं है। पिछले साल गोरखपुर के कूड़ाघाट में इस तरह के घी का सैंपल लिया गया था, जिसकी जांच रिपोर्ट में वह मिलावटी पाई गई थी। खाद्य सुरक्षा से जुड़े जानकारों के अनुसार, इतनी कम कीमत पर मिलने वाली देसी घी में वनस्पति घी, रिफाइंड तेल और केमिकल फ्लेवर मिलाए जाने की आशंका रहती है।
जिले में हर दिन दो पिकअप से आता है यह देसी घी
सूत्रों के मुताबिक यह घी गोपालगंज से होकर सीमावर्ती कस्बों और ग्रामीण बाजारों में खपाया जाता है। सफेद रंग के प्लास्टिक डिब्बों में आने वाली इस घी पर न तो किसी ब्रांड का नाम होता है और न ही गुणवत्ता या निर्माण तिथि का कोई उल्लेख। मिठाई के दुकानदार इसे खरीद लेते हैं और इससे ही देसी घी की मिठाई बनाकर बड़ी दुकानों पर सप्लाई कर रहे हैं।
त्योहारों में बढ़ जाती है खपत
सूत्रों के मुताबिक 450 रुपये प्रति किलोग्राम वाली यह घी मिठाई की लागत कम करने का आसान जरिया बन गया है। इसलिए त्योहार आते ही इसकी खपत बढ़ जाती है। इस समय यह धंधा कमजोर है, लेकिन फरवरी में इसकी मांग काफी बढ़ जाएगी। पिछले दिनों जब सहालग था, तब भी इसकी खूब खपत हो रही थी। इस समय हर दिन जिले में दो पिकअप से माल आ रहा है।
पेट से संबंधित बीमारियों का रहता है खतरा
मेडिकल कॉलेज के डॉ. निखिलेश मिश्र बताते हैं कि इस तरह की मिलावटी घी से बनी मिठाई खाने से पेट की बीमारियां, लीवर से जुड़ी समस्याएं और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।