देवरिया। करीब 37 साल पुराने जमीन संबंधी विवाद में सिविल न्यायालय ने वादी बैजनाथ को राहत दी है। अदालत ने पैरवी के अभाव में 11 मई 2022 को खारिज किए गए वाद को तीन हजार रुपये हर्जाने पर दोबारा बहाल करने का आदेश दिया है।
सिविल जज दीक्षा त्रिपाठी की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश पारित किया। मामले में अगली सुनवाई 26 अक्तूबर को होगी। न्यायालय में वर्ष 1989 से बैजनाथ बनाम ग्राम पंचायत आदि का वाद चल रहा था। इसमें 21 सितंबर 2021 को अदालत ने हंसनाथ को पक्षकार बनाने का आदेश दिया था। वादी ने इस आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में निगरानी याचिका दाखिल की थी।
इसी बीच 11 मई 2022 को वादी की अनुपस्थिति और पूर्व आदेश का पालन नहीं होने पर वाद खारिज कर दिया गया। बैजनाथ ने वाद बहाल करने की मांग करते हुए बताया कि वह वृद्ध हैं। सुनवाई से दो दिन पहले अचानक बीमार पड़ गए थे। उल्टी-दस्त और तेज बुखार के कारण अदालत नहीं पहुंच सके। प्रतिवादी हंसनाथ और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आवेदन का विरोध किया गया।
उनका कहना था कि बीमारी के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य नहीं दिए गए हैं। वादी जानबूझकर मामले को लंबित रखना चाहते हैं। अदालत ने पत्रावली और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। न्यायालय ने माना कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुसार दोनों पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर मिलना चाहिए और वाद का निस्तारण गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए। अदालत ने वादी के शपथपत्र और बिना विलंब आवेदन देने को ध्यान में रखते हुए तीन हजार रुपये हर्जाने पर वाद बहाल कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्तूबर को निर्धारित की गई है।