करवा चौथ व्रती महिलाओं ने चांद का दीदार किया।
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देवरिया। पति के अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनों बुुधवार को करवा चौथ व्रत रखा। चंद्रदेव का दर्शन करने के बाद सुहागिनों ने पति के हाथ पानी पीकर व्रत को पूरा किया। करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी एक ही समय होते हैं।
यह भगवान गणेश के लिए उपवास करने का दिन है। भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा की गई। व्रत को चन्द्रमा के दर्शन और अर्घ अर्पण करने के बाद ही तोड़ा गया। करवा चौथ का व्रत कठोर होता है।
और इसे अन्न और जल ग्रहण किये बिना ही सूर्योदय से रात में चन्द्रमा के दर्शन तक किया जाता है। बुधवार की रात साढ़े आठ बजे के बाद जैसे ही चंद्रोदय हुआ, महिलाओं ने उन्हें अर्घ्य दिया।