देवरिया। शहर का चीनी ग्राउंड सरकारी जमीन के रूप में दर्ज किया जाएगा। चीनी मिल और ग्राउंड को बसपा शासनकाल में आइकान सुगर मिल प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली के हाथों 2011 में बेच दिया गया। इसको लेकर हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई थी। इसमें हाईकोर्ट ने भूमि को सरकारी खाते में दर्ज करने का आदेश दिया है। इसको लेकर जिलाधिकारी ने सीआरओ से पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। जबकि दूसरी नजूल की भूमि का विक्रय करने के मामले की जांच भी होगी।
देवरिया चीनी मिल 2006-07 में बंद हो गई। इसे आइकान सुगर मिल प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली के हाथों 2011 में बेच दिया गया था। वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने सशर्त चीनी मिल की बिक्री कराई। इसमें स्पष्ट उल्लेख था कि आधुनिक रूप में इसे चलाते हुए चीनी और बिजली उत्पादन किया जाएगा। मिल खरीदने वाली कंपनी ने शर्तों की अनदेखी की। इस मामले को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। जबकि दूसरी तरफ प्रदेश सरकार ने एसलपी दाखिल किया था लेकिन कुछ माह वापस ले लिया हे। इसके कारण हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि भूमि का विक्रय गलत तरीके से किया गया है। काश्तकारों और नजूल की भूमि बेचने का अधिकार सुगर कारर्पोरेशन को नहीं है। इसको आदेश की प्रति कलेक्ट्रेट बार के पूर्व अध्यक्ष बृज बांके तिवारी ने जिलाधिकारी को उपलब्ध कराते हुए भूमि को सरकारी खाते में दर्ज करने को कहा है। इस डीएम ने पूरे मामले में सीआरओ को कार्रवाई करने का निर्देश है। सीआरओ ने ग्राम देवरिया खास, भरौली बाजार, मेहड़ा नगर बाहर की भूमि का रिकार्ड बुधवार की शाम को तहसीलदार सदर ने उपलब्ध करा दिया है। विभागीय सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो चीनी मिल के लिए अधिगृहित भूमि को नियमों की अनदेखी कर बेची गई थी। इसमें कई जगहों पर ऐसी भूमि है, जिनका विक्रय नहीं हो सकता है। पर विभागीय मिलीभगत से भूमि को बेच दिया गया है। हाईकोर्ट के आदेश के तहत बहुत जल्द इस भूमि पर जिला प्रशासन का अधिकार हो जाएगा।
कोट
चीनी मिल की भूमि से संबंधित रिकार्ड मांगा गया है। हाईकोर्ट के आदेशों का पालन किया जाएगा। पूरे मामले की जांच पड़ताल की जा रही है। - रजनीश राय, सीआरओ