संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। कोतवाली में दर्ज धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़े प्राथमिकी की जांच को लेकर दाखिल याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निस्तारित कर दी है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसी कोई सामग्री नहीं है, जिससे यह साबित हो कि संबंधित विवेचक निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है या निष्पक्ष जांच नहीं कर रहा है।
जांच के तरीके से शिकायत होने पर याचिकाकर्ता को एसपी देवरिया के समक्ष आवेदन देने का विकल्प दिया गया है। एसपी से कानून के अनुसार जांच सुनिश्चित कराने की अपेक्षा की गई है।
मृत्युंजय पांडेय की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्रिमिनल मिसलेनियस रिट पिटीशन दाखिल की गई थी। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार सहित छह लोगों को प्रतिवादी बनाया गया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्र की पीठ ने की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता केदार नाथ मिश्र और रोहित कुमार मिश्र ने पक्ष रखा।
याचिका में एसपी देवरिया की निगरानी में पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से समयबद्ध विवेचना कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी। मामला कोतवाली में केस क्राइम नंबर 224/2026 के रूप में दर्ज है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 472 और 120-बी लगाई गई है।
याचिकाकर्ता ने कोतवाली पुलिस से जांच हटाकर राज्य अथवा केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने की भी मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई तथ्य नहीं है, जिससे विवेचक की निष्पक्षता पर संदेह किया जा सके।