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पथरदेवा इलाके से हुई पराली जलाने की शुरुआत, अब तक आए 38 मामले

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पथरदेवा इलाके से हुई पराली जलाने की शुरुआत, अब तक आए 38 मामले
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देवरिया। पराली जलाने वालों पर सेटेलाइट की पैनी नजर है। जिले के अलग-अलग जगहों से पराली जलने की 38 तस्वीरें सेटेलाइट ने कैद की है। मौजूदा सीजन का पहला मामला पथरदेवा ब्लॉक के इलाके से आया। 27 अक्तूबर को पथरदेवा ब्लॉक के रामपुर महुआबारी में पराली जलने की सूचना सेटेलाइट के माध्यम से कृषि विभाग को मिली थी। इसके बाद अन्य जगहों पर पराली जलाने की घटना आम हो गई।
सेटेलाइट से मिले आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल जिले के 13 ब्लॉकों में फसल अवशेष जले हैं। बरहज ब्लॉक में सर्वाधिक 11 जगहों पर किसानों ने पराली जलाई है। दूसरे नंबर पर पथरदेवा ब्लाक में छह जगहों पर फसल अवशेष जले हैं। रामपुर कारखाना, तरकुलवा, भाटपाररानी ब्लॉक में एक भी मामले सेटेलाइट की नजर में नहीं आए। तहसील व कृषि विभाग की टीम मौके का सत्यापन कर संबंधित लोगों के खिलाफ जुर्माना व मुकदमे की कार्रवाई में जुटी है।
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इनसेट
यह हुई है कार्रवाई
- 22 किसानों पर कार्रवाई हुई है।
- 2,80,000 रुपये जुर्माना वसूला गया।
- दो कंबाइन मशीन सीज हुए हैं।
ब्लॉकवार पराली जलने के मामले
पराली जलाने के मामलों पर गौर किया जाए तो बरहज में 11, पथरदेवा में छह, देसही देवरिया में चार, भागलपुर में तीन, बैतालपुर में दो, गौरीबाजार में दो, देवरिया सदर में दो, भलुअनी में दो, भटनी में दो, रुद्रपुर, सलेमपुर, बनकटा और लार में एक-एक मामले सामने आए हैं। (यह आंकड़े 13 नवंबर तक सेटेलाइट से मिली सूचना पर आधारित है।)
दो सौ से अधिक जगहों पर जली है पराली
जिले में 38 जगहों पर पराली जलने की यह सूचना कृषि विभाग को सेटेलाइट के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा दो सौ से अधिक जगहों पर किसानों ने फसल अवशेष जलाए हैं। जिनकी तस्वीर सेटेलाइट ने अभी नहीं भेजी है। ऐसे मामलों पर नजर रखने की जिम्मेदारी तहसील व कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों को दी गई है। कार्य में लापरवाही बरतने पर उप कृषि निदेशक ने 12 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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पराली जलाने पर इतना है जुर्माना
क्षेत्रफल - जुर्माना
दो एकड़ तक - 2.5
पांच एकड़ तक - 05
15 एकड़ तक - 15
-- ( जुर्माने की धनराशि हजार में)
किसान पराली नहीं जलाएं, इसके लिए सख्ती बरतने के साथ उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है। कृषि विभाग पांच की पांच टीम अलग-अलग तहसील क्षेत्र में किसानों को जागरूक कर रही है। बायो डिकंपोजर के जरिए फसल अवशेष को सड़ाकर खाद बनाने की सलाह दी जा रही है।
- एके मिश्रा, उप कृषि निदेशक
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