देवरिया। पशु और शराब तस्करी रोकने के लिए शासन स्तर से सख्त कार्रवाई के बावजूद बिहार बार्डर से हो रही तस्करी ने पुलिस महकमे की चिंता बढ़ा दी है। आशंका है कि तस्करों के ये गैंग बड़े अपराधी संचालित करा रहे हैं। इसको देखते हुए एक बार फिर बिहार बार्डर पर एसटीएफ की सक्रियता बढ़ाई गई है। एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि एसटीएफ बार्डर पर तस्करी नहीं रुकने के पीछे की असल वजह तलाश कर रही है।
गोरखपुर जिले के पिपराइच में पशु तस्करों ने एक युवक की हत्या कर दी थी। इसको लेकर वहां बड़ा बवाल हुआ था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसटीएफ को जांच व कार्रवाई का जिम्मा सौंपा गया था। छानबीन में यह बात सामने आई थी कि देवरिया और कुशीनगर जिले में मुख्य मार्ग से होकर पशु तस्करों की गाड़ियां बिहार बार्डर पार होती हैं। इसके बाद दोनों जिलों के एसपी तो बदले ही गए, कई थानेदारों का भी कार्यक्षेत्र बदला गया था।
इसके बाद महीने भर तक मामला शांत रहा। फिर तस्कर अपने पुराने ढर्रे पर लौट आए। आए दिन बिहार बार्डर पर पशु तस्करों की गाड़ियां पकड़ी जाती हैं। बीते 10 दिन में तीन बार तो बरहज में रामजानकी मार्ग पर पशुओं से लदे पिकअप पकड़े जा चुके। खास बात यह है कि पशु तस्कर लगातार पड़ोस के जिलों आजमगढ़, जौनपुर से आ रहे हैं।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि बढ़ती घटनाओं को देखते हुए एक बार फिर एसटीएफ को बार्डर इलाके में सक्रिय किया गया है। आशंका है कि पशु व शराब तस्करों के इस गैंग को कुछ बड़े अपराधी गैंग संचालित कर रहे हैं, जिस वजह से ही घटनाएं रुक नहीं रही हैं। पिछले दिनों बार्डर पर तैनात एक थानेदार ने बताया कि पशु तस्कर व शराब तस्कर अब असलहा लेकर चल रहे हैं, इसलिए रात में उनसे सीधे टकराने के बजाय पुलिस सड़क पर कील लगा पट्टा रखती है।