नागरी प्रचारिणी में शिक्षिका कौशल्या सुमाली लक्सलानी ने प्रेसवार्ता की।
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श्रीलंका की शिक्षक को मिलेगा विश्व नागरी रत्न
देवरिया। नागरी प्रचारिणी सभा की ओर से इस बार विश्व नागरी रत्न से श्रीलंका की शिक्षक कौशल्या सुमाली लक्सलानी को सम्मानित किया जाएगा। वह श्रीलंका में भारतीय दूतावास में सहायक के रूप में काम करने के अलावा कैंडी में पद्यांजली हिंदी निकेतन के जरिए भाषा को बढ़ावा दे रही हैं। पुरस्कार ग्रहण करने के लिए उनका शहर में आगमन हो गया है।
संस्था की ओर से शनिवार को मंत्री डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी, आचार्य परमेश्वर जोशी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोई विदेशी पहली बार जिले में आकर नागरी प्रचारिणी सभा से यह सम्मान ग्रहण करेगा। इसके लिए संस्था भी गौरान्वित महसूस कर रही है। बताया कि वर्ष 2015 से हिंदी के प्रचार-प्रसार में लगे प्रवासी एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले साहित्यकारों को संस्था विश्व नागरी रत्न सम्मान से विभूषित करती रही है। इस वर्ष यह सम्मान श्रीलंका में हिंदी के प्रति समर्पित शिक्षक डीएमआरटी कौशल्या सुमाली लक्सलानी को दिया जाएगा।
पुश्तैनी घर से शुरू किया हिंदी को आगे बढ़ाने का कार्य
कौशल्या सुमाली ने दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मद्रास और केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा से हिंदी की शिक्षा ली। उसके बाद 13 अक्तूबर वर्ष 2005 में अपने पुश्तैनी घर में ही हिंदी निकेतन के जरिए इस भाषा का अध्यापन मात्र एक बच्चे से शुरू किया। उन्होंने यह काम खुद अपने सीमित संसाधनों से किया और वर्ष 2011 में उन्होंने कुरुणैगल जिले में एक जगह किराए पर लेकर पद्यांजली हिंदी निकेतन की स्थापना की। वर्ष 2013 में कैंडी जिले में एक और जगह किराए पर लेकर उस जिले के बच्चों को नि:शुल्क हिंदी पढ़ाना शुरू किया।
भारत के सहायक उच्चायोग कैंडी का भारतीय कला केंद्र हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार करने वाला सबसे प्रमुख संस्थान माना जाता है। वर्ष 2015 में कौशल्या को इस केंद्र की हिंदी अध्यापक की उपाधि से सुशोभित किया गया। वह तभी से भारतीय कला केंद्र के विद्यार्थियों को दक्षिण भारतीय हिंदी की परीक्षाओं एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान के पाठ्यक्रम के लिए तैयार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 से अब तक जब पूरी दुनिया कोविड महामारी से लड़ रही है। साथ ही श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव हुआ है। फिर भी उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाना चालू रखा है।