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खेल प्रशिक्षकों का नहीं हुआ नवीनीकरण, चले कोर्ट की राह

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खेल प्रशिक्षकों का नहीं हुआ नवीनीकरण, चले कोर्ट की राह
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स्टेडियम के प्रशिक्षकों ने भी जताई सहमति, अप्रैल माह से नहीं मिला मानदेय
उत्तर प्रदेश डिप्लोमाधारी खेल प्रशिक्षक संघ ने उच्च न्यायालय में दाखिल की रिट याचिका
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में तैनात खेल प्रशिक्षक सत्र शुरू होने के बाद से ही नवीनीकरण की राह देख रहे हैं। अब तक नवीनीकरण नहीं होने से अप्रैल माह से ही उन्हें मानदेय नहीं मिला है। ऐसे में उनके सामने अब आर्थिक दिक्कतें खड़ी होने लगी हैं। नवीनीकरण और मानदेय की मांग को लेकर डिप्लोमाधारक खेल प्रशिक्षक एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने अब उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की है। स्थानीय स्तर पर तैनात प्रशिक्षकों ने भी इसका समर्थन किया है।
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उत्तर प्रदेश डिप्लोमाधारक खेल प्रशिक्षक एसोसिएशन ने प्रदेश के सभी जिलों के स्टेडियम में तैनात खेल प्रशिक्षकों को पहली अप्रैल 2020 से अभी तक का वेतन भुगतान और उनके नवीनीकरण संबंधी मांग को लेकर पहले खेल निदेशालय एवं उच्चाधिकारियों से अपनी गुहार लगाई। कहीं सुनवाई नहीं होने पर प्रशिक्षक हित की रक्षा एवं उनकी मांगों को लेकर संघ के सचिव विकास यादव ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह व सचिव विकास यादव ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते स्टेडियम में कुछ शर्तों के साथ खिलाड़ियों को आने की अनुमति दी गई है। शारीरिक संपर्क वाले खेलों का प्रशिक्षण नहीं शुरू किए जाने का आदेश है। पिछले साल जिन खेलों के प्रशिक्षण चले अभी तक उनके प्रशिक्षकों का नवीनीकरण नहीं किया गया। देवरिया स्टेडियम के कोच गिरीश सिंह, क्रांतिदेव यादव, शालिनी, पवन कुमार, ओंकार मणि त्रिपाठी ने बताया कि नवीनीकरण नहीं होने और मानदेय नहीं मिलने से उनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उधर, जिला क्रीड़ाधिकारी केके पांडेय ने बताया कि खेल निदेशालय की ओर से अभी खेलों का प्रशिक्षण शुरू नहीं करने के निर्देश हैं। जैसे ही वहां से आदेश होगा, प्रशिक्षकों का नवीनीकरण और मानदेय मिलना शुरू हो जाएगा।
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