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महान आध्यात्मिक संत स्वामी आत्मानंद नहीं रहे

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महान आध्यात्मिक संत स्वामी आत्मानंद नहीं रहे
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रुद्रपुर। बाबा दुग्धेश्वरनाथ की नगरी रुद्रपुर की माटी को पवित्र करने वाले विख्यात आध्यात्मिक संत स्वामी आत्मानंद का बुधवार की ब्रह्मबेला में तीन बजे निधन हो गया। गोरखपुर जिले के बड़हलगंज थाना क्षेत्र स्थित अपने आध्यात्मिक मठ कोराड़ी आश्रम में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 91 वर्ष के थे।
पूर्वांचल में वैराग्य और आध्यात्म की धुनी रमाने वाले महान संत आत्मानंद के देश विदेश में अनुयायी हैं। रुद्रपुर के जफराबाद गांव में एक साधारण परिवार में जन्म लेकर वैराग्य का रास्ता चुनने वाले आत्मानंद ब्रह्मलीन आध्यात्मिक संत स्वामी स्वतंत्रता नंद जी महाराज के शिष्य थे। उन्होंने अपने जीवन काल में विश्वकल्याण के लिए कई यज्ञ और अनुष्ठान कराए। स्वामी जी करीब आधा दर्जन आध्यात्मिक ग्रंथों की रचनाकर लोगों को मोह माया और वैराग्य का दर्शन करा रहे हैं। उनका आध्यात्मिक मठ कोराड़ी आश्रम से अध्यात्म और धर्म में रुचि लेने वाले देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु जुड़े हैं। उनके निधन की खबर लगते ही कोराड़ी आश्रम से जुड़े विभिन्न श्रद्धालु पहुंचने लगे। अंतिम संस्कार धार्मिक रीति रिवाज से गाजीपुर जिला स्थित गंगा के तट पर किया गया।
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वैराग्य मार्तंड सहित पांच ग्रंथों के रचनाकार थे स्वामी आत्मानंद
रुद्रपुर। देवरिया जिले के रुद्रपुर तहसील स्थित जाफराबाद गांव के एक साधारण कृषक परिवार में जन्म लेकर स्वामी आत्मानंद महराज ने अपनी कृतियों से दूसरी काशी के रूप में प्रसिद्ध रुद्रपुर की धरती को पवित्र कर दिया। उनके निधन से रुद्रपुर के आध्यात्म का सूर्य अस्त हो गया। वर्ष 1930 में जन्में स्वामी आत्मानंद बाल ब्रह्मचारी संत थे। उन्होंने गोरखपुर के सेंट एंड्रयूज कॉलेज से वर्ष 1953 में बीएससी की डिग्री हासिल की। उनका बचपन से ही आध्यात्म की ओर झुकाव रहा। गोरखपुर से पढ़ाई कर गांव लौटे तो उनकी मुुलाकात आध्यात्मिक संत स्वतंत्रतानंद महाराज से हुई। वह उनसे प्रभावित होकर वैराग्य जीवन जीने का निश्चय कर लिए। उन्होंने 60 के दशक में गृह त्याग कर अध्यात्म का रास्ता अख्तियार कर लिया। आध्यात्मिक जीवन के दौरान मातृभूमि से लगाव बना रहा। उनके मार्गदर्शन में शिव की नगरी रुद्रपुर में कई बार संत समागम, यज्ञ अनुष्ठान, व्याख्यान प्रवचन आदि होते रहे। उन्होंने अपने पैत्रिक गांव जाफराबाद में भी आध्यात्मिक कुटी बनाई। जहां क्षेत्र के तमाम श्रद्धालु आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। कोराड़ी आश्रम से जुड़े ज्योतिष आचार्य गिरिजेश धर ने कहा कि स्वामी जी के निधन से पूर्वांचल के अध्यात्म का सूर्य अस्त हो गया। उन्होंने छह मानव उपयोगी ग्रर्थों की रचना की है। उन्होंने वैराग्य मार्तंड, जीवन मुक्ति दर्पण, संन्यास धर्म संहिता, श्रीगुरुगीतासुधा सिंधु और जीवन मुक्ति रहस्य जैसे ग्रंथों की रचना की है। यह ग्रंथ दुविधा में फंसे हर मानव का मार्गदर्शन कर रहें हैं। उनके निधन से अध्यात्म जगत को गहरा आघात लगा है।
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