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Deoria News: मसाले भी मिलावटी...बिगाड़ देंगे जायका

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देवरिया। होली में रसोई का स्वाद बढ़ाने वाले मसालों में मिलावट का खेल तेज हो गया है। बाजार में जीरा, काली मिर्च और दालचीनी जैसे खड़े मसालों की बड़ी खेप पहुंची है, जिनमें मिलावट की आशंका जताई जा रही है। चर्चा है कि बंगलुरू से प्रयागराज के रास्ते सस्ते दामों पर लाया गया मसाला स्थानीय स्तर पर खपाया जा रहा है।
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खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि खड़े मसालों में खराब और सस्ते दानों की मिलावट कर उन्हें पिसवाकर बेचा जा रहा है। खासकर पिसे मसालों में मिलावटी और खराब माल की खपत सबसे ज्यादा होती है, क्योंकि पाउडर बनने के बाद उसकी पहचान करना आम उपभोक्ता के लिए मुश्किल हो जाता है।
बताया जा रहा है कि 10 और 20 रुपये में बिकने वाले नॉन ब्रांडेड मसालों में मिलावट की आशंका अधिक है। कम कीमत के लालच में ग्राहक ऐसे पैकेट खरीद लेते हैं, लेकिन गुणवत्ता और शुद्धता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नकली काली मिर्च में पपीते के सूखे बीज, जीरे में घास और दालचीनी में दूसरी पेड़ों की छाल मिलाए जाने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। त्योहार के समय मांग बढ़ने का फायदा उठाकर धंधेबाज अधिक मुनाफा कमाने के लिए इस तरह का खेल करते हैं।
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गोरखपुर में पकड़ी जा चुकी है काली मिर्च
मिलावट का यह धंधा गोरखपुर से ही आसपास के जिलों में फैला है। पिछले साल व्यापारियों की सूचना पर एक ट्रक काली मिर्च गोरखपुर के लालडिग्गी इलाके में पकड़ा गया था। बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि यह धंधा अभी भी जारी है। अब प्रयागराज से छोटी गाड़ियों से नकली माल की खेप गोरखपुर आता है और वहां से देवरिया भेज दिया जाता है। सबसे अधिक मिलावट जीरा में होती है। तमिलनाडु में पाई जाने वाली एक घास बिल्कुल जीरे की रंगत वाली होती है। इसे जीरा में मिला देने से वजन और मात्रा दोनों ही बढ़ जाता है। यही स्थिति दालचीनी की है। तस्करी के जरिए प्रयागराज की मंडी में पहुंचकर दालचीनी पूरे प्रदेश में बिकती है।

सेहत के लिए है नुकसानदेह
मसाले केवल खाने का स्वाद हीं नहीं बढ़ाते हैं बल्कि पाचन में भी इनका योगदान है। मसालों को औषधि माना जाता है। खाने में इसकी जरा सी मात्रा कम या अधिक हो जाने पर न केवल खाने का स्वाद बिगड़ जाता है, बल्कि पाचन तंत्र पर भी असर पड़ता है। ऐसे में अगर मसाला मिलावटी या खराब है तो वह और अधिक नुकसान करेगा। हर त्योहार के बाद सबसे अधिक मरीज पेट की बीमारी के आते हैं। खराब मसलों से फूड प्वाइजनिंग की आशंका रहती है।
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डॉ गौरव पांडेय, फिजिशियन, पेट रोग विशेषज्ञ
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