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सपा डकैतों का गिरोह, जनता के धन से अय्याशी के लिए माफी मांगें अखिलेश : योगी

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जनसभा को संबो​धित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
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देवरिया। सपा का मतलब है लूट खसोट। यह डकैतों का गिरोह है। सपा मुखिया ने जनता का जो पैसा स्वयं की अय्याशी पर खर्च किया है उसके लिए वे जनता से माफी मांगें। ये कहना है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का। वह सलेमपुर और भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र में 305 करोड़ से होने वाले विकास कार्यों के लोकार्पण व शिलान्यास के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने यूपीटीईटी पास अभ्यर्थियों के लिए जल्द ही शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी किए जाने की भी घोषणा की।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के ‘बबुआ’ 12 बजे सोकर उठते हैं। इससे उनका दिमाग भारी रहता है और वह झुंझलाते हैं। पत्रकारों के सवाल पर वह गाली-गलौज व हाथापाई करने पर उतारू हो जाते हैं। मैंने सुना कि अखिलेश यादव ने एक बार पत्रकार के गले पर तलवार रख दिया था। मीडिया लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में है। यदि कोई सरकार-प्रशासन गलत करता है तो मीडिया ध्यानाकर्षण करती है लेकिन जब मीडिया ने बबुआ की सच्चाई उजागर की तो उन्होंने पत्रकार के गले पर तलवार रख दी।

बीमार मानसिकता की वजह से फैल रही थी इंसेफेलाइटिस
इंसेफेलाइटिस का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल 15 जुलाई से 15 नवंबर के बीच पूर्वांचल के माता-पिता अपने बच्चों की जान को लेकर चिंतित रहते थे। नवकी बीमारी (इंसेफेलाइटिस) केवल बीमारी नहीं बल्कि बीमार मानसिकता की वजह से फैल रही थी। सत्ता में बैठे लोगों की संवेदनशीलता मर चुकी थी। हर साल बच्चे मर रहे थे लेकिन न तो कभी सपा के सीएम हाल पूछने आए और न कभी कांग्रेस के सीएम-पीएम ने गरीबों की सुधि ली।
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जो हाल जनता दल का हुआ, वही सपा का भी होगा
सीएम ने कहा कि सपा मुखिया कहते हैं कि एक ही परिवार के पांच सांसद हैं, इसलिए पार्टी बची है। हमने कहा कि खैर मनाइए कि सपा बची है, वरना हाल ऐसे ही होंगे जैसे जनता दल के हुए थे।


अपने आदर्श नेता को भी नहीं बख्शा ‘सैफई सिंडिकेट’ ने
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में बने जेपीएनआईसी (जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर) की प्रारंभिक लागत 200 करोड़ थी। सपा ने इस पर 864 करोड़ खर्च कर दिए। तब भी यह अधूरा रहा। यह 200 करोड़ ‘सैफई सिंडिकेट’ का नहीं बल्कि प्रदेश की जनता का पैसा था। यदि अब सरकार उस पर पैसा लगाएगी तो कम से कम 150-200 करोड़ रुपये और खर्च होंगे। यह सरकार के खजाने से 900-1000 करोड़ खर्च करके इसे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को देना चाहते थे। सपा की मंशा थी कि सरकार के पैसे से बने जेपीएनआईसी को प्रा. लि. कंपनी चलाएगी। इसमें होटल, क्लब, जिम आदि रहेगा और कमाई भी घर में ही जाएगी। इस घर के अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव व इनके शागिर्द प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर प्रदेश के खजाने पर डकैती डाल रहे थे। 2017 में हमारी सरकार आई तो हमने उसे लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को दे दिया। एलडीए ने जांच कराई। रिपोर्ट आने के बाद विज्ञापन निकाला। सरकार अब उस पर पैसा खर्च करने को तैयार नहीं थी बल्कि जो पैसा खर्च हुआ है, वह सरकार के खजाने में आए इसके लिए सरकार ने व्यवस्था प्रारंभ की है। जिस पैसे से युवाओं को रोजगार, गांव की कनेक्टिविटी के लिए फ्लाईओवर, इनोवेशन सेंटर, विश्वविद्यालय आदि बनते, अपनी अय्याशी के लिए प्रदेश के उस खजाने में डकैती डालने के लिए सपा मुखिया को जनता से माफी मांगनी चाहिए।


शिक्षक भर्ती का अधियाचन जा चुका, जल्द जारी होगा विज्ञापन
सीएम ने कहा कि प्रदेश में एक साल के भीतर सरकार एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देगी। यूपीटीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की भर्ती का अधियाचन जा चुका है, विज्ञापन जारी होने वाला है। जल्द ही शिक्षकों की भर्ती भी करेंगे। 45 हजार होमगार्ड, 36 हजार पुलिस (4 हजार सब इंस्पेक्टर) की भर्ती होगी। उप्र पब्लिक सर्विस कमीशन के तहत अलग-अलग विभागों में 30 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र देने जा रहे हैं। सीएम ने कहा कि दो करोड़ नौजवानों को टैबलेट देंगे। इसमें 50 लाख से अधिक नौजवान पा चुके हैं। 25 लाख का फिर से ऑर्डर दिया गया है। स्नातक अंतिम वर्ष के बच्चे को टैबलेट देंगे। अब नौकरी में अब कोई सेंध नहीं लगा पाता, सपा मुखिया को इसी बात की चिढ़ है।
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