। साहब ! डेेढ़ महीने हो गए हैं अपने लाल का मुंह देखे। अब तो आंख भी सूज गई है।
रोजाना पुलिस वालों के चक्कर काटते हुए, लेकिन कोई मदद को तैयार नहीं। कोई मेरी मदद करे मेरे बेटे को लौटा दें...। इतना कहते ही अख्तरी बेगम और एहसान अहमद की आंखें छलछला उठीं। बमुश्किल बोले, 12 अप्रैल को घर से बाहर खेल रहे सईद को अगवा कर लिया गया। फिरौती मांगने का मैसेज आया, लेकिन पुलिस अब तक सईद का पता तक नहीं लगा सकी है। भर्राए गले से बोले, अब मैं अपने औलाद के लिए कहां जाऊं। पुलिस के अधिकारियों से कइयों बार मुलाकात की। हर बार कोशिश में है जल्द ही बरामद हो जाएगा, अब तो पुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि एसटीएफ लगा दी जाए।
तरकुलवा के पोखरभिंडा निवासी एहसान अहमद शहर का परिवार सोमनाथ नगर मोहल्ले में रहता है। 12 अप्रैल को उनके साढ़े पांच वर्षीय पुत्र सईद अहमद का अपहरण कर लिया गया। दो दिन बाद सईद की मौसी के मोबाइल फोन पर फिरौती देने का मैसेज आया। पुलिस को सूचना देने पर अंजाम बुरा होने का मैसेज आया। पुलिस की छानबीन में पता चला कि बघौचघाट के हरपुर निवासी मंदीप के मोबाइल से मैसेज किया गया है।
पुलिस ने केस दर्ज कर छानबीन आगे बढ़ाई लेकिन डेढ़ माह भी मासूम का पता नहीं चला।
पुलिस की ओर से मासूम की बरामदगी एक चुनौती बन गई है। शनिवार को दंपत्ति ने अमर उजाला दफ्तर पहुंचकर अपनी पीड़ा जाहिर की।
दंपत्ति ने बताया कि वह एसपी प्रभाकर चौधरी से कई बार मिल चुके हैं। एसपी की तरफ से केवल आश्वासन मिला है। उन्हें अपने जिगर के टुकड़े से कोई मिलवा दे। वह किस हाल में होगा, पता नहीं। बेटे की सलामती को लेकर घर के परिवारवालों की चिंता बढ़ गई है और नाते-रिश्तेदार भी चिंतित हैं।