देवरिया। पटाखों का धुआं सांस और हृदय रोगियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को सांस फूलने, खांसी और सीने में जकड़न की शिकायत हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतने की जरूरत है।
चिकित्सकों की सलाह है कि सांस के मरीज अधिक धुआं होने पर घर के अंदर रहें। नियमित दवाएं और इनहेलर साथ रखें। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचें।
चिकित्सकीय सलाह के अनुसार, प्रदूषण बढ़ने पर घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें। बाहर निकलना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला एन-95 मास्क लगाएं। हालांकि, इससे हानिकारक गैसों से पूरी सुरक्षा नहीं मिलती। बच्चों और बुजुर्गों को पटाखों से दूर रखें। अधिक प्रदूषण के दौरान बाहर व्यायाम करने से बचें।
पटाखों से झुलसने पर प्रभावित हिस्से को करीब 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी के नीचे रखें। आंख में चोट लगने पर उसे रगड़ें नहीं और न ही फंसी वस्तु निकालने का प्रयास करें।