-दो किमी नाले पर स्लैब नहीं पड़ा, सहमे रहते हैं लोग
-रामनाथ देवरिया पश्चिमी चौराहे से कूर्ना नाले तक का यह दो किमी नाला वहां आसपास के लोगों के लिए बना अभिशाप
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। वर्ष 2021 में वाटर ड्रेनेज परियोजना मंजूर की थी, लेकिन रामनाथ देवरिया पश्चिमी चौराहे से कूर्ना नाले तक का यह दो किमी नाला आसपास के लोगों के लिए अभिशाप बन गया है। करीब 10 फीट चौड़ा और 15 फीट गहरा नाला सड़क के किनारे खुला है। नाले के निर्माण के साथ उसके ऊपर स्लैब भी रखवाना परियोजना में शामिल था, लेकिन बजट न होने की बात कहते कहते अधिकारियों ने दो साल बिता दिए।
उनकी अनदेखी के चलते आए दिन कोई न कोई इसमें गिर रहा है। स्थानीय लोगों की गाय, भैंस और अन्य पशु इसमें गिर जा रहे हैं। नाले से सटकर जिनका आवास है, वह अपने बच्चों को घर में बंद करके रखते हैं कि कहीं खेलते-खेलते उसमें गिर न जाएं। दो साल से नाला बनने के बाद वह सहमे रहते हैं। साथ ही नाले में गिरने की घटना से वह मानसिक रूप से अपने बच्चों को लेकर परेशान हैं।
41.33 करोड़ की थी परियोजना
जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए शासन ने वर्ष 21-22 में 41.33 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की थी। करीब दो किमी 15 फीट गहरा आरसीसी नाला बन भी गया है। यह नाला रामनाथ पश्चिमी चौराहे से लेकर कूर्ना नाले तक बना है, लेकिन इस परियोजना में नाले के ऊपर स्लैब भी डालना था। जो अभी तक नहीं हुआ। इस परियोजना का 28 नवंबर 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिलान्यास किया था।
स्थानीय लोगों से जब बातचीत की गई तो लोगों ने बताया कि नाला निर्माण जब शुरू हुआ तो हम लोग बहुत खुश थे कि अब जलभराव नहीं होगा। नाला निर्माण के बाद हमें अब हमेशा डर सताने लगा है। नाले से ठीक सटे सड़क होने के कारण आए दिन मोटरसाइकिल वाले इसमें गिर जा रहे हैं। नाले से सटे मकानों में रहने वालों ने कहा कि पहले हम गाय भैंस पाले हुए थे, लेकिन नाले में गिरने के डर से हमने उन्हें बेच दिया। अब हम पालतू जानवर रखते ही नहीं। लोगों ने कहा कि ठेकेदार के पास हम लोग इकट्ठा होकर गए थे। उसका कहना है कि बजट ही नहीं है तो कैसे स्लैब रखवाएं।
एक की नाले में गिरने से हो चुकी है मौत
नाले से सटे मकान में रहने वाली किस्मती देवी का कहना है कि बाबू नाला लइकन के जान के लिए ऑफत बन गईल बा। एक दिन रात में करीब ढेढ़ बजे एक आदमी के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। किस्मती देवी के अनुसार वह दौड़ के गई तो देखा कि एक बाइक नाले के बगल में गिरा हुआ है। एक आदमी नाले के अंदर से चिल्ला रहा था। किस्मती देवी ने और लोगों को वहां बुलाया। सबके प्रयास से उसे निकला गया। उसके सिर में गहरी चोट लगी थी। किस्मती देवी ने उसके चोट को दुपट्टे से बांधा था। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे अस्पताल में दाखिल कराया था। बाद में उसकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी कुछ दिन पहले दो लड़कियां दोपहिया वाहन से जा रही थीं। उसमें एक लड़की गिर गईं थी। आसपास के लोगों ने उसे निकाला। एक गाय चार दिन पहले ही गिर गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई। लोग बताते हैं कि आए दिन उनके पालतू जानवर उसमें गिर जाते हैं। बड़ी मुश्किल से हम उन्हें निकालते हैं।
क्या बोले लोग
नाले से ठीक सटे मकान होने से हमेशा भय बना रहता है। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं। उनको घर में बंद करके रखते हैं कि कही अकेले खेलते-खेलते नाले में न गिर जाए। नाला बनने के पहले एक गाय रखे थे। लेकिन नाला खुला रहने के कारण गाय के गिरने का डर बना रहता था। फिर उसे बेचना पड़ा। खुले नाले के कारण अब यहां कोई मवेशी रख रहा है।
-पुरुषोत्तम, स्थानीय निवासी
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अभी चार दिन पहले मेरी गाय गिर गई थी। किसी तरह से उसे निकाला। लेकिन कूल्हे में चोट लगने से उसकी मौत हो गई। नाले पर स्लैब नहीं होने से आए दिन जानवर और राहगीर इसमें गिरते है। जिम्मेदारों की इसकी कोई परवाह नहीं है।
-दीपू कुमार यादव, स्थानीय निवासी
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दो साल हो गया है नाला निर्माण को, लेकिन अभी तक स्लैब नहीं रखा गया है। इसके लिए हमलोग ठेकेदार से भी मिले थे। उसका कहना है कि बजट खत्म हो गया है। बजट आएगा तो स्लैब रखवा दिया जाएगा। जिम्मेदार भी इससे मुंह मोड़े हुए हैं। स्थानीय निवासियों को हमेशा डर सताता रहता है।
-विपिन बिहारी, स्थानीय निवासी
बच्चे साइकिल से स्कूल आते जाते हैं। सड़क के ठीक सटे होने और नाले का लेवल समान होने के कारण हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। झाड़ झंखाड़ उगने से कहीं नाला दिखता ही नहीं है। रात में थोड़ा सा भी काई सड़क के किनारे चला गया तो व नाले में गिर सकता है।
-शैलेष यादव, स्थानीय निवासी