बरहज। स्थानीय कस्बा निवासी व्यवसायी सुमित जायसवाल की 24 अगस्त 2019 की देर रात पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में न्यायालय ने हैदर अली, इस्तेहार अहमद, फैय्याज, सिट्टू, सन्नी साहनी और शालू को 10-10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। पीड़ित पक्ष ने न्यायालय के इस फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि उम्रकैद की सजा होनी चाहिए थी।
बताया जा रहा है कि 24 अगस्त 2019 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की दूसरी रात डीजे बजाने से मना करने पर व्यवसायी सुमित जायसवाल की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। पिता मन्नू लाल जायसवाल की तहरीर पर पुलिस ने छह नामजद और 11 अज्ञात के खिलाफ गंभीर धारा में केस दर्ज किया था। कोर्ट ने पटेल नगर निवासी हैदर अली पुत्र निजामुद्दीन, इस्तेहार अहमद, फैय्याज पुत्रगण तफाजुल राइन, सिट्टू उर्फ हैदर पुत्र इकबाल राईन, सन्नी साहनी, पुत्र संतोष साहनी, शालू पुत्र नसरूद्दीन के विरूद्ध फैसला सुनाया है।
न्यायालय के फैसले पर पिता मन्नू लाल, मां संजू देवी और सुमित की पत्नी ज्योति जायसवाल का कहना है कि न्यायालय के फैसले का सम्मान है लेकिन आरोपियों को कम से कम आजीवन कारावास की सजा होनी चाहिए थी।
सीओ राजेश चतुर्वेदी ने बताया कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुलिस की प्रभावी पैरवी से गैर इरादतन हत्या के प्रकरण में छह अभियुक्तों को सश्रम कारावास और अर्थदंड लगाया गया है।