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मासूम की मौत मामला: साहब... आर्यन मुंह चिढ़ाता था, उसके मामा के घर से काफी समय से चल रहा है भूमि का विवाद

Tue, 25 Jul 2023 03:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।

सार

मासूम का शव बरामद होने और हत्या की जानकारी मिलते ही उसके घर और ननिहाल में कोहराम मच गया। पिता नंदीप विश्वकर्मा, माता रिंकू देवी, नाना राजेंद्र, नानी रमावती, मौसी सोनम, मामा बैजनाथ और मामी कलावती दहाड़े मारकर रोने लगे। दोनों परिवारों का रोना देखकर सांत्वना देने आए ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गई।
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आर्यन की हत्या के बाद घटनास्थल पर जांच पड़ताल करने पहुंचे एसपी संकल्प शर्मा। संवाद
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विस्तार
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ममेरा भाई अजीत रात में आर्यन के मामा का हमदर्द बन कर उसकी खोजबीन कर रहा था। पर जब परिजनों को शक हुआ तो पुलिस ने आरोपी को रात में ही हिरासत में ले लिया। करीब दो घंटे तक पुलिस को चकमा देते रहा, लेकिन बाद में उसने जेहन में छिपे राज को उगल दिया।

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उसने बताया कि दो माह में पहले आर्यन क्रिकेट खेल रहा था। इसी दौरान उसकी बाल आरोपी अजीत की बाइक पर गिर गई। इसको लेकर उसके मामा से विवाद हो गया था। इस दौरान आरोपी ने धमकी दी थी कि वह बहुत जल्द सबक सिखाएगा। उसने बताया कि काफी समय पहले आर्यन के नाना ने पट्टीदारी की एक भूमि धोखे से बैनामा करा ली थी, जिसमें हम लोगों का भी हिस्सा बनाता था। इसको लेकर कई बार विवाद भी हुआ था।

अब आए दिन जब दरवाजे पर बैठता था या आता जाता था तो आर्यन मुंह चिढ़ाता था। इसको लेकर बहुत गुस्सा आता था। हमने सोच लिया था कि इसे किसी तरह खत्म कर देना है। इसी को लेकर हमने घटना को अंजाम दे दिया। मारने के बाद हमें कोई अफसोस नहीं है।
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मासूम के घर और ननिहाल में मचा कोहराम

मासूम का शव बरामद होने और हत्या की जानकारी मिलते ही उसके घर और ननिहाल में कोहराम मच गया। पिता नंदीप विश्वकर्मा, माता रिंकू देवी, नाना राजेंद्र, नानी रमावती, मौसी सोनम, मामा बैजनाथ और मामी कलावती दहाड़े मारकर रोने लगे। दोनों परिवारों का रोना देखकर सांत्वना देने आए ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गई।

परिजनों का रोना देख छोटा भाई यशवीर हो गया बदहवास
गौरा निवासी नंदीप विश्वकर्मा के दो बेटे आर्यन और यशवीर थे। यशवीर तीन वर्ष छोटा है। आर्यन की मौत की जानकारी मिलते ही परिजन दहाड़े मारकर रोने लगे। परिजनों को रोते देखकर मासूम यशवीर पहले तो सिसक पड़ा फिर बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगा। आसपास के लोगों ने उसको संभाल कर परिजनों को दिया। मासूम यशवीर बदहवास होकर परिजनों को रोता देखता रहा।

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