रेल प्लेटफॉर्म पर घुड़सवारी में फंसे पूर्व मंत्री को फिलहाल राहत नहीं
देवरिया। चार साल पहले रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म 2 पर घोड़ा दौड़ाने के मामले में फंसे प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री शाकिर अली को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। स्टेशन पर घुड़सवारी के आरोपी शाकिर अली पर दर्ज केस की वापसी की राज्य सरकार की पहल पर रेलवे की तरफ से ब्रेक लगा दिए गए हैं।
इस मामले में केंद्र सरकारी की सहमति जरूरी बताते हुए पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल के सुरक्षा आयुक्त ने डीएम को चिट्ठी भेजी है। मामला पथरदेवा क्षेत्र के विधायक शाकिर अली से जुड़ा है, जो राज्य सरकार में बेसिक-माध्यमिक शिक्षा मंत्री भी रहे थे।
पूर्व मंत्री शाकिर अली के पहली अप्रैल 2012 को वैशाली एक्सप्रेस से लखनऊ से देवरिया पहुंचने का कार्यक्रम पता चलने पर उनके स्वागत में जुटे समर्थक बैंड और घोड़े के साथ ही प्लेटफॉर्म दो पर पहुंच गए थे। स्वागत और नारेबाजी के बीच समर्थकों के आह्वान पर शाकिर अली घोड़े पर सवार हो गए और इसी अंदाज में प्लेटफॉर्म पार करते हुए स्टेशन के मुख्य द्वार से बाहर निकले।
रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर घुड़सवारी पर सवाल उठे तो तत्कालीन स्टेशन अधीक्षक देवेंद्र प्रताप जायसवाल की तहरीर पर आरपीएफ पोस्ट पर शाकिर अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में शाकिर अली के अलावा गौरीबाजार क्षेत्र के गुडरी निवासी रामयादी यादव को भी दोषी ठहराया गया था।
पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी के न्यायालय में 11 फरवरी 2013 को यह मामला पहुंचा। 23 फरवरी 2013 को न्यायालय की ओर से सम्मन जारी किए गए थे। बचाव में शाकिर अली ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की और हाईकोर्ट के निर्देश पर वाराणसी रेलवे न्यायालय से जमानत करानी पड़ी थी।
सह अभियुक्त रामयादी यादव ने भी हाईकोर्ट की शरण ली थी, जिसपर हाईकोर्ट ने अग्रिम आदेश तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इस बीच प्रदेश सरकार ने इस केस की वापसी का प्रस्ताव करते हुए जिलाधिकारी से आख्या मांगी थी, जिस पर डीएम से रेलवे को पत्र लिखा था। रेलवे के जवाब से फिलहाल केस वापसी की कोशिश पूरी होती नहीं दिख रही है।