लार (देवरिया)। नेपाल के नुवाकोट में आए सैलाब में वहां रहने वाले लार कस्बे के एक ही परिवार सात लोग घिर गए थे। आंखों के सामने घर-दुकान सब कुछ बह गया। ये सातों किसी तरह पहाड़ की चोटी पर पहुंच गए और वहां बने एक मकान में सभी लोग शरण लिए थे। जिससे उनकी जान बच गई। चार दिनों से वह पहाड़ पर ही फंसे हुए हैं। शनिवार की भोर में सेना के एक हेलीकाप्टर ने एक दंपती को रेस्क्यू कर बटार पहुंचाया। अन्य पांच लोग अभी भी वहीं फंसे हुए हैं। रेस्क्यू किए गए दोनों लोग रविवार रात लार पहुंचे।
दोनों आंखों देखी मंजर बयां कर कांप जा रहे हैं। उन्हें वहां फंसे अपनों की चिंता सता रही है। लार नगर के अनुसूचित बस्ती के रहने वाले 70 वर्षीय मो. जफर परिवार के साथ नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार में मकान बनवा कर रहते थे। वहीं उनकी कपड़े की दुकान थी। उनके साथ पत्नी शाहीन अख्तर, बेटे मो. रजा, जेया और सिरी शाहीम वहां अध्यापक हो गए थे। इनके रिश्तेदार जमील अहमद की भी वहां कपड़े की दुकान है। वह भी पत्नी के साथ वहां रहते थे।
लार पहुंचे जमील ने वहां के हालात का बयां करते हुए कहा कि सुबह पांच बजे के करीब लोग अभी जगे ही थे। परिवार के कुछ सदस्य चाय पी रहे थे और कुछ अभी सो रहे थे। तभी आसपास के लोगों ने पानी-पानी का शोर मचाया। अचानक मची चीख पुकार की आवाज सुन परिवार के सभी लोग जग गए। इतने ही देर में खिड़की से देखा तो पानी का सैलाब आते दिखा। जिसमें कुछ बड़े वाहन और लोग बहते नजर आए। हमारा मकान ऊंचाई पर था तो हमें थोड़ा वक्त मिल गया। आनन-फानन में कुछ ही मिनटों में सभी सदस्य घर छोड़ पीछे के रास्ते पहाड़ पर चढ़ने लगे। संयोग ठीक रहा कि हम लोग इतनी ऊंचाई तक चढ़ पाए, जहां पानी नहीं पहुंचा। जैसे ही कुछ ऊंचाई पर पहुंचे तो देखा कि जफर की और हमारी कपड़े की दुकान और मकान पानी के तेज बहाव से गिरकर मलबे के रूप मे बहने लगा है। उसमें रखा सारा सामान बह गया। पड़ोस के रहने वाले कई लोग पानी के साथ बह रहे थे। हम बेबस आखों से बस देखते रहे।
पल भर में हालात ऐसा बने की सब कुछ खत्म हो गया। सड़कें टूट गईं। चारो तरफ पानी का सैलाब दिखने लगा। लोगों की चीखपुकार अब भी कानों में सुनाई पड़ रही है। बार-बार वही मंजर आंखों के सामने आ रहा है। चार दिन फंसे रहने के बाद मदद के लिए सेना का हेलीकाॅप्टर पहुंचा। जिसके बाद रेस्क्यू कर उन्हें बटार पहुंचाया गया। पांच लोग अब भी पहाड़ के ऊपर बने स्थानीय लोगों के घरों में शरण लिए हुए हैं। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू टीम लगी हुई है। जहां खतरा अधिक है वहां पहले टीम पहुंच रही है।
भारतीय दूतावास की मदद से आए अपने देश
मोहम्मद जफर करीब 50 वर्षो पहले नेपाल के त्रिशूली बाजार चले गए थे। इसी वार्ड के जमील अहमद भी पत्नी के साथ 30 वर्षों से नेपाल में रह कर कपड़े की दुकान चलाते हैं। लार कस्बे के कपड़ा व्यावसायी नसीम अनवर को इनके बारे में जानकारी थी। उन्होंने ही भारतीय दूतावास को इसकी सूचना दी। भारतीय दूतावास के अफसरों ने तत्काल नेपाल के अफसरों से संपर्क कर जानकारी दी। इसके बाद नेपाल सेना के जवानों ने पहाड़ पर फंसे जमील अहमद और शाहीन बानो को रेस्क्यू कर बटार पहुंचाया।
सुबह जल्द उठने की आदत से बची जान
जमील अहमद ने कहा कि सुबह सात बजे के करीब परिवार के सभी लोग अपने अपने काम पर चले जाते थे। इसलिए सभी सुबह पांच बजे से पहले उठने के आदी थे। संयोग ठीक रहा कि पांच बजे के करीब सोकर लोग उठे। उसी वक्त सैलाब आया और ऊपर वाले का शुक्र है कि सभी एक साथ सुरक्षित हैं।