श्री बैकुंठनाथ पवहारि संस्कृत महाविद्यालय के 62 वें वार्षिक अधिवेशन का अतिथियो ने दीप प्रज्वलित ?
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भाषा ही नहीं, संपूर्ण विश्व की आत्मा भी है संस्कृत : सदर सांसद
देवरिया। श्री बैकुंठनाथ पवहारि संस्कृत महाविद्यालय का 62वां वार्षिक अधिवेशन शनिवार को मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि व सदर सांसद डॉ. रमापति राम त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत भाषा नहीं बल्कि भारत के साथ-साथ ही संपूर्ण विश्व की आत्मा है। हम सभी को मिलकर इसके उन्नयन व संवर्धन के अभी बहुत कार्य करना है।
समाजसेवी आनंद सागर उर्फ बबलू तिवारी ने विद्यालय परिवार व विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा हाल व बैकुंठनाथ भगवान मंदिर के मुख्य द्वार को बनवाकर शनिवार को अगहन सुदी पंचमी को श्री बैकुंठनाथ भगवान के चरणों में समर्पित किया। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रो. ब्रजभूषण ओझा ने कहा कि विद्यालय की इस परंपरा को देखकर खुशी हुई कि समाज का सबसे बड़ा स्तंभ एक शिक्षक और यह गुरुकुल शिक्षा का बड़ा केंद्र बना हुआ है। जरूरत है जो हमारे वेद ,उपनिषद ,पुराण, आयुर्वेद इनको समझना व इसको समाज में स्थापित करना है। कार्यक्रम को डॉ. सूर्यभान पांडेय, प्राचार्य डॉ. योगेश चतुर्वेदी ने भी संबोधित किया। इस दौरान गन्ना अनुसंधान संस्थान के उपाध्यक्ष नीरज शाही, विधायक कमलेश शुक्ल, विजय मणि त्रिपाठी, कृपाशंकर उपाध्याय, संजय मिश्रा आदि ने भी संबोधित किया। अतिथियों का स्वागत विद्यालय के प्रबंधक अंगद तिवारी ने किया।
धूमधाम से निकली राम बरात
कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार की शाम परंपरागत रुप से उमेश शाही के वहां से राम बरात हाथी घोड़ा व बैंड बाजा के साथ निकली। द्वार पूजन के बाद फुलवारी तक पहुंचा। इसके बाद मंदिर परिसर में बने विवाह मंडप में महाविद्यालय के छात्रों द्वारा बने राम सीता ,लक्ष्मण के स्वरूप का विवाह कार्य संपन्न हुआ । इसे देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु रात तक जमे रहे।