फोटा समाचार....................
दुधमुंही मासूम के सिर से उठा मां का साया
दो माह से गोरखपुर में एक निजी अस्पताल में संध्या का चल रहा था इलाज
हालत में सुधार नहीं होने पर दो रोज पहले डॉक्टरों ने संध्या को भेज दिया था घर
प्रसव के बाद डॉक्टर ने ऑपरेशन के टांका में सिल दिया था बच्चेदानी और यूरीन नली
पथरदेवा स्थित निजी अस्पताल की डॉक्टर की करतूत से संध्या की दोनों किडनी हो चुकी थी फेल
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल किया सील, रजिस्ट्रेशन निरस्त, संचालक पर केस दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। तथाकथित महिला डॉक्टर की लापरवाही के चलते करीब दो माह से जिंदगी व मौत से लड़ रही संध्या की सांसें बुधवार को जवाब दे गईं। संध्या की मौत के बाद परिवार सहित पूरे गांव में मातम छा गया। मौत के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने उसकी बच्चेदानी व यूरिन नली एक साथ सिल दिया था। तब से उसकी हालत खराब थी। गोरखपुर में इलाज के दौरान सोमवार को डॉक्टरों ने हालत में सुधार नहीं होने पर संध्या को घर भेज दिया था। परिजन दरवाजे पर शव रखकर आरोपी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। पुलिस ने उन्हें समझाया। उधर, स्वास्थ्य विभाग ने रजिस्ट्रेशन निरस्त करते हुए अस्पताल सील कर दिया और केस भी दर्ज कराया है।
बघौचघाट थाना क्षेत्र के पांडेयपुर मुड़ेरा निवासी संध्या पटेल को 19 जनवरी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन गांव की आशा के बहकावे में आकर पथरदेवा के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिए। यहां ऑपरेशन से बच्ची पैदा हुई। उसके बाद डॉक्टर ने बच्चेदानी में टांका लगाया। लापरवाही का आलम यह रहा कि डॉक्टर ने बच्चेदानी के साथ यूरीन नली की भी सिलाई कर दी। महिला की हालत बिगड़ी और यूरिन आना बंद हो गया तो डॉक्टर ने इलाज करने के बजाय उसे रेफर कर दिया।
संध्या को लेकर परिजन गोरखपुर एक निजी अस्पताल में गए तो वहां पता चला कि बच्चेदानी और यूरीन नली एक साथ सिल दी गई है। इससे उसकी दोनों किडनी फेल हो गई है।
उसके बाद परिजन महिला को एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिए, तभी से महिला की डायलिसिस चल रही थी। डॉक्टरों ने हालत में सुधार नहीं होने पर सोमवार को उसे घर भेज दिया। संध्या की बुधवार सुबह मौत हो गई। परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया। बघौचघाट थाना प्रभारी मृत्युंजय राय ने मौके पर पहुंचकर परिजनों से दाह संस्कार के लिए बात की लेकिन वे शव दरवाजे पर रखे रहे।
दुधमुंही बच्ची को प्यार-दुलार नहीं कर पाई संध्या
देवरिया। प्रसव पीड़ा होने पर डॉक्टर ने ऑपरेशन किया तो उसने एक बेटी को जन्म दिया। जन्म देने के कुछ घंटे बाद संध्या की हालत बिगड़ गई। परिजन कुछ समझ पाते कि डॉक्टर ने उसे गोरखपुर रेफर कर दिया। यहां जाने पर जानकारी हुई कि संध्या की तबीयत बच्चेदानी व यूरीन नली को एकसाथ सिलने के चलते बिगड़ी है। इधर, संध्या अपनी दुधमुंही बच्ची को लाड़-प्यार करने की कौन कहे जीभर कर देख ही नहीं सकी थी। वह करीब दो माह से गोरखपुर में भर्ती थी। डॉक्टरों ने उसे घर भी भेजा तो उसकी हालत चिंताजनक थी। आखिरकार संध्या ने दम तोड़ दिया।
परिजनों ने डॉक्टर व कर्मियों पर केस दर्ज करते हुए लाइसेंस निरस्त करने की मांग
देवरिया। संध्या की मौत के बाद उसके परिजनों का सब्र जवाब दे गया है। डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति उनके अंदर आक्रोश है। संध्या के ससुर रामसागर पटेल अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की है, लेकिन अस्पताल और तथाकथित महिला डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीएमओ ने जांच टीम बनाई थी। टीम के निरीक्षण के बाद अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर खानापूर्ति की गई। परिजनों की मांग है कि अस्पताल के कर्मियों और डॉक्टर पर केस दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए।
अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज
पथरदेवा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की तहरीर पर दर्ज हुआ केस
देवरिया। पथरदेवा के आस्था हॉस्पिटल के पास ओपीडी और आईपीडी का रजिस्ट्रेशन था। उसी आड़ में वहां सर्जरी भी होती थी। इस अस्पताल में फर्जी लैब और अल्ट्रासाउंड केंद्र चल रहा था। तीन सदस्यीय टीम की जांच में यह खुलासा हुआ। इसी रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ के आदेश पर पथरदेवा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी प्रभात रंजन ने हॉस्पिटल संचालक और महिला डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज कराया है। डॉ. प्रभात रंजन ने बताया कि हॉस्पिटल संचालक से सूचना मांगी गई थी। हॉस्पिटल के सर्जन और बेहोशी डॉक्टर की वह जानकारी नहीं दे पाया। मौके से अस्पताल बंद कर फरार हो गया था। अस्पताल को सील कर दिया गया है। उसके खिलाफ केस दर्ज कराया गया है।
कोट
परिजनों से बात हुई है। उनकी मांग है कि डॉक्टर व कर्मियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। उनसे तहरीर की मांग की गई है। तहरीर मिलने पर तथाकथित डॉक्टर व कर्मियों पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
-संजय कुमार रेड्डी, सीओ सिटी
मामले में टीम गठित कर जांच कराई गई। रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल को सील करते हुए रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया गया है। साथ ही अस्पताल के संचालक के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है।
-डॉ. राजेश झा, सीएमओ