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फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर पाया काबू
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बस अड्डा परिसर में खड़ी अनुबंधित बस में अचानक आग लग गई। इससे बस जलने लगी। कुछ ही देर में आग ने बस को अपने आगोश में ले लिया और लपटें उठने लगीं। यह देखकर वहां मौजूद अन्य बसों को हटाकर दूसरी जगह खड़ा किया गया। सूचना पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची और आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक बस पूरी तरह जल चुकी थी।
शहर के सिविल लाइंस इलाके में स्थित बस डिपो में सोमवार की रात साढ़े दस बजे देवरिया डिपो की अनुबंधित बस संख्या यूपी 52 टी 2746 में आग लग गई। कुछ ही देर में बस जलने लगी और उसमें से तेज लपटें उठनी लगीं। डिपो कर्मियों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे फायर ब्रिगेड कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाने में कामयाबी पाई।
आग इतनी भीषण थी कि दो दमकल गाड़ियों के 45 मिनट के प्रयास के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। डिपो कर्मियों ने बताया कि जली बस देवरिया डिपो की अनुबंधित बस थी, जो पडरौना (कुशीनगर) से सलेमपुर (देवरिया) चलती है। सीनियर फोरमैन रमेश कुमार ने बताया कि देर तक खड़ी बस में अक्सर चूहे प्रवेश कर जाते हैं और उसमें उछलकूद करते हैं। लगता है कि चूहों के काटने से कहीं बैटरी के पास तार खुले हो गए थे और रात में आपस में टकराने से स्पार्किंग हुई होगी। इसी से बस में अचानक आग लग गई और यह घटना हुई। डिपो में बराबर पहरा रहता है। रात में रोडवेज कर्मी भी कार्यशाला के अलावा परिसर में खड़ीं अन्य गाड़ियों की निगरानी करते हैं। किसी की ओर से बस में आग लगाने जैसी बात जांच में सामने नहीं आई है।
बस मालिक ने कोतवाली में दी घटना की तहरीर
उधर, बस मालिक विवेक पांडेय ने कोतवाली पुलिस को आगजनी के संबंध में तहरीर दी है। उनका कहना है कि बस में शाॅर्ट सर्किट से आग लगी है। बगल में खड़ी दूसरी बस नंबर आंशिक रूप से जली है।
कोट
सोमवार की सुबह 11 बजे ही डिपो में बस आकर खड़ी हो गई थी। रात में साढ़े 10 बजे उन्हें भी वाचमैन ने घटना की जानकारी दी। इसके बाद सभी लोग डिपो में पहुंच गए। देर रात में ही सर्विस मैनेजर ने भी आकर घटना की जानकारी ली। शुरुआती जांच में चूहों के काटने से बैटरी के पास कहीं नंगे तार आपस में छू गए, इसलिए स्पार्किंग होने से घटना घटित होने की बात सामने आ रही है। बस आठ साल पुरानी थी। इसी आधार पर करीब छह से सात लाख रुपये के क्षति का आकलन निगम की ओर से किया गया है। इसकी रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को दी गई है।
-मो. इरफान, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक