दुर्गा पूजा पंडाल में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते साहब अली
देसही देवरिया। धर्म और मजहब की दीवारों से ऊपर उठकर हेतिमपुर के साहब अली आपसी सद्भाव की मिसाल पेश कर रहे हैं। वह पिछले चार वर्षों से शारदीय नवरात्र में व्रत रखकर मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित कराते हैं।
विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद गाजे-बाजे के साथ मूर्ति विसर्जित करते हैं। इसके दो दिन बाद नौ कन्याओं को भोजन कराकर अंगवस्त्र भेंट करते हैं। हेतिमपुर निवासी समीन अली के चार बेटों में साहब अली तीसरे नंबर पर हैं। उनकी अभी शादी नहीं हुई है। वह टेंपो चलाकर परिवार का जीवनयापन करते हैं।
नवरात्र शुरू होने से करीब एक माह पहले ही पंडाल बनाने की तैयारी में जुट जाते हैं। स्थानीय लोगों से चंदा जुटाते हैं और शेष खर्च खुद उठाते हैं। करीब 50 हजार रुपये की लागत से भव्य पंडाल तैयार कराकर मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित कराते हैं।
इसके बाद ब्राह्मण को बुलाकर पूजा-पाठ कराते हैं। नवरात्र के बाद सभी के सहयोग से छोटी गंडक नदी के तट पर मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।
साहब अली के इस कार्य में उनके पिता, भाई, माता आशा और बहन रुखसाना भी सहयोग करती हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर आयोजन को सफल बनाते हैं।
साहब अली का कहना है कि यह श्रद्धा और विश्वास का विषय है। सभी को एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए। मां दुर्गा की मूर्ति सबके सहयोग से स्थापित कराई जाती है। आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ सभी त्योहार मनाने चाहिए। संवाद