सलमान अंसारी ने अपने दोस्त यशमणि त्रिपाठी और श्रेयांश बरनवाल के साथ रक्तदान किया।
रक्तदान के लिए सलमान अंसारी ने रोजा छोड़ दिया और मंगलवार को जिला अस्पताल के ब्लॅड बैंक में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर के हिस्सा बने। उन्होंने अपने दोस्तों यशमणि त्रिपाठी और श्रेयांश बर्नवाल के साथ रक्तदान कर युवाओं के लिए प्रेरणा का काम किया है।
शहर के अहमदनगर निवासी सलमान अंसारी एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ से एनीवेशन कोर्स कर रहे हैं। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से रक्तदान शिविर की जानकारी उन्हें मंगलवार की सुबह भीखमपुर निवासी अपने दोस्त यशमणि त्रिपाठी से हुई। यशमणि ने सलमान के अलावा दूसरे दोस्त श्रेयांश बरनवाल को भी रक्तदान के प्रेरित किया। श्रेयांश रक्तदान के लिए तैयार हो गया लेकिन सलमान के रक्तदान करने में रोजा आड़े आ गया। भूखे रहकर रक्तदान नहीं किया जा सकता है। काफी देर विचार विमर्श के बाद सलमान ने अपनी मां रूखसाना से बात की।
मां ने रक्तदान करने को महान कार्य बताया। मां की रजामंदी मिलने के बाद सलमान ने रोजा छोड़ दिया और शाम चार बजे तीनों दोस्त ब्लॅड बैंक पहुंचे और रक्तदान में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। सलमान कहते हैं कि रोजा रखने पर देर शाम को ही रक्तदान कर पाता, तबतक ब्लॅड बैंक बंद हो जाता। इसलिए रोजा छोड़ दिया।
यशमणि कहते हैं कि रक्तदान की प्रेरणा उन्हें अपने बड़े भाई से मिली थी। बड़े भाई ने इलाहाबाद में रक्तदान कर एक व्यक्ति की जिंदगी बचाई थी। भाई के दो साल पहले इलाहाबाद छोड़ने के बाद भी उस परिवार से नजदीकी रिश्ते आज भी हैं। वैवाहिक कार्यक्रम हो या कोई अन्य कार्यक्रम, इलाहाबाद में रहने वाला वह परिवार भइया को आज भी बुलाता है। भइया के बाहर होने के कारण अभी हाल में मैं वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल हुआ था। उनका प्रेम देखकर बहुत अच्छा लगा।