बरहज/देवरिया। जनपद में लोगों की अजीब दुर्दशा है। एक तरफ नेपाल में हुई बारिश के पानी से जहां जनपद की नदिया उफान पर आ रही हैं और तटवर्ती इलाकों के लोगों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। वहीं, जनपद में बारिश न होने से किसानों के खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं जिससे उन्हें सूखे का खतरा सता रहा है। रजवाहे भी सूखे पड़े हैं। इससे किसानों की खेती की लागत बढ़ रही है।
दो दिन पहले स्थिर रहा सरयू, राप्ती और गोर्रा नदियों का जलस्तर बृहस्पतिवार से बंधों की चढ़ाई चढ़ने लगा है। बरहज गेज स्थल से आई रिपोर्ट के मुताबिक सरयू अब खतरे के निशान से पांच सेमी ऊपर बह रही है। वहीं, गोर्रा और राप्ती के जलस्तर में भी बृहस्पतिवार से चढ़ाव जारी है। इसके चलते तटवर्ती गांवों के लोग बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं।
परसिया देवार के बृजबिहारी यादव, घनश्याम आदि का कहना है कि जब भी नदी का पानी चढ़ता है तब उतार के दौरान कटान होने लगती है। कृषि योग्य भूमि नदी के पेट में समा जाती है। बता दें बुधवार की सुबह जिले की चारों नदियों का जलस्तर लगभग सामान्य था। बृहस्पतिवार की शाम से सरयू, राप्ती और गोर्रा नदी के जलस्तर में एक से डेढ़ मीटर की बढ़ोतरी हो गई। शुक्रवार की शाम सरयू खतरे के निशान 66.50 मीटर को पार कर 66.55 के निशान पर बहने लगी। वहीं छोटी गंडक नदी का जलस्तर पहले की भांति सामान्य है।
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नदियों का जलस्तर (मीटर में)
नदी - खतरा - जलस्तर
सरयू - 66.50 - 66.55
राप्ती - 70.50 - 67.55
गुर्रा - 70.50 - 67.70
छोटी गंडक - 63.80 - सामान्य
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2020 में आई बाढ़ के दौरान घिर गए थे 19 टोले
भदिला प्रथम के मोहन सिंह का कहना था है कि जिला प्रशासन को सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर को देख सतर्क मोड में रहना होगा। तीन साल पहले अगस्त 2020 में आई बाढ़ के कारण भदिला प्रथम, विशुनपुर देवार के 19 टोले बाढ़ के पानी से घिर गए थे। इस दौरान 25 हजार से अधिक की आबादी को दुश्वारी झेलनी पड़ी थी।
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बोले लोग
जलस्तर बढ़ने से नदी के रास्ते होने वाले आवागमन में दिक्कतें बढ़ जाएंगी। लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। जबकि मवेशियों के लिए चारा का संकट गहरा जाएगा। फिलहाल हालात सामान्य हैं।
- रामआसरे यादव, कटइलवा
नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी नालों के रास्ते बहने लगा है। बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न होने से फसलों काे नुकसान होने के साथ-साथ मवेशियों के लिए चारा का संकट हो जाएगा। नदी बंधे पर टकरा रही है।
- विवेक सिंह, बेलडाड़
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13 दिन में हुई 2.4 एमएम बारिश
नदियों के जलस्तर में भले ही चढ़ाव हो रहा हो मगर 13 दिनों में अभी तक महज 2.4 एमएम बारिश ही हुई है। इससे खेतों में भी कहीं पानी नहीं लगा है। बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना है कि नेपाल में हो रही लगातार बारिश का असर जिले की नदियों में दिख रहा है।
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नेपाल में हो रही बारिश के चलते जिले की सरयू, राप्ती और गोर्रा नदी के जलस्तर में वृद्धि हुई है। सरयू खतरे के निशान से पांच सेमी ऊपर बह रही है। हालांकि भयभीत होने की बात नहीं है। बंधे सुरक्षित और मजबूत हैं। निगरानी बढ़ा दी गई है।
- एनके जाड़िया, एक्सईएन बाढ़ खंड।
गांव वालों को सताने लगी बाढ़ की चिंता
सलेमपुर। सरयू नदी का जलस्तर 24 घंटे से लगातार तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही तटवर्ती क्षेत्र के लोगों की धड़कनें बढ़ने लगीं हैं। नदी का जलस्तर तुर्तीपार रेगुलेटर पर चेतावनी के निशान को पार कर गया है। नदी तेजी से खतरे के निशान की तरफ बढ़ रही है। तुर्तीपार रेगुलेटर पर नदी का जलस्तर शुक्रवार दोपहर 64.02 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी लेवल 64.00 मीटर से 2 सेंटीमीटर ऊपर है। तुर्तीपार रेगुलेटर के कर्मचारियों के अनुसार नदी दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है, जिससे पानी रिहायशी इलाकों की तरफ फैल रहा है। फिलहाल नदी रेगुलेटर पर अंकित खतरे के निशान 64.30 से 28 सेमी नीचे बह रही है। लेकिन, नदी के जलस्तर में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही तटवर्ती इलाकों के लोगों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। लोगों में बाढ़ और कटान की आशंका को लेकर दहशत व्याप्त है। हालांकि, नदी के जलस्तर में वृद्धि इस साल पहली बार हो रही है। नदी बीते सालों में जून के अंतिम सप्ताह में ही बढ़ जाती थी। तटवर्ती इलाका भागलपुर बलिया, छित्तूपुर, देवसियां, नरियांव, मईल, तेलिया के लोगों का मानना है कि अगर नदी की रफ्तार इसी तरह बढ़ता रहा तो तबाही तय है। एसडीएम बरहज अवधेश कुमार निगम ने बताया कि बाढ़ को लेकर तहसील प्रशासन मुस्तैद है। राहत चौकियों पर तहसील कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया है, निगरानी रखी जा रही है। संवाद