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Deoria News: मौसम में परिवर्तन से संक्रामक बीमारियों का खतरा, रहें सतर्क

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- बुखार, सर्दी, जुकाम, पेट दर्द, उल्टी- दस्त, स्क्रब्टाइफस, पीलिया, मलेरिया, टायफाइड, फंगल इंफेक्शन के आ सकते हैं चपेट में
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मौसम बदलने और वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ने से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। इन दिनों साफ-सफाई में अनदेखी और खानपान में गड़बड़ी से संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में सतर्क रहने की जरूरत है। मेडिकल कॉलेज में संक्रमण से ग्रसित मरीज बढ़ रहे हैं। रोजाना करीब सौ मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इसमें बच्चे भी होते हैं। डाॅक्टर दवा के साथ बचाव की सलाह दे रहे हैं।


मौसम में परिवर्तन का लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। बारिश के बाद धूप के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा रहता है। जल जनित और मच्छर के काटने से लोग बीमार होते हैं। बैक्टीरिया, वायरस बढ़ते हैं। खानपान, साफ-सफाई पर ध्यान नहीं देने पर लोग बीमारी चपेट में आते हैं। बारिश का पानी एकत्र होने से मच्छर का प्रकोप बढ़ जाता है। इनके काटने से लोग बीमार हो जाते हैं।
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जुलाई से सितंबर तक संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहा है। इससे बचने के लिए सावधानी जरूरी है। इधर कई दिनों तक रुक-रुक बारिश के बाद धूप हो रही है। वातावरण में नमी है। इसके चलते वायरस व बैक्टीरिया बढ़ रहे हैं, जिससे लोग बुखार, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, सांस से पीड़ित हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में इस तरह के मरीज आ रहे हैं।
बृहस्पतिवार को शनिवार को मेडिसिन विभाग में सर्दी, खांसी, बुखार के 60, पेट दर्द से पीड़ित 80, उल्टी-दस्त के 20 मरीज इलाज कराने पहुंचे, जबकि बाल रोग विभाग में भी भीड़ रही। यहां 50 प्रतिशत वायरल इंफेक्शन से पीड़ित बच्चों को लेकर तीमारदार पहुंचे थे। डॉक्टर ने दवा देने के साथ मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दी।





मौसम बदलने पर संक्रामक रोग का प्रकोप बढ़ जाता है। जलजनित और मच्छर के काटने से बीमारियां फैलती हैं। इसकी चपेट में लोग आते हैं। इसके चलते मलेरिया, डेंगू, टायफाइड, लीवर इंफेक्शन, सर्दी, जुकाम, खांसी, सांस की बीमारी से लोग पीड़ित हो जाते हैं। इस मौसम में सजग रहने की जरूरत है। सफाई और खानपान पर ध्यान देना चाहिए। लक्षण मिलने पर तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए।
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-डॉ. सराजुद्दीन, फिजीशियन, मेडिकल कॉलेज




-इम्युनिटी कम होने से बच्चे हो जाते हैं बीमार

मौसम बदलने पर वातावरण में नमी हो जाती है। इसके चलते वायरस, बैक्टीरिया, वायरस ग्राेथ करते हैं। फंगल इंफेक्शन का भी खतरा रहता है। इम्युनिटी कम होने के कारण बच्चे बीमार हो जाते हैं। सफाई न कर भोजन करने, हाथ मुंह में बार-बार डालने से छाेटे बच्चे बैक्टीरिया की चपेट में आ जाते हैं। रोटा वायरस के कारण उल्टी, दस्त, बुखार, पेट दर्द से पीड़ित हो जाते हैं। इस मौसम में डेंगू, मलेरिया, टायफाइड, लेक्टो एस्पायोरेसिस, स्क्रब्टायफस, पीलिया, चिकनगुनिया से लोग पीड़ित हो जाते हैं। इस मौसम में सावधानी जरूरी है। बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बीमार होने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर इलाज कराना चाहिए। मेडिकल कॉलेज में सभी सुविधाएं हैं।





यह बरतें सावधानी

- स्वच्छ पानी पीएं



- मच्छरों से बचाव करें

- घर में व आसपास पानी इकट्ठा न होने दें, झाड़ की सफाई करें



- सफाई पर ध्यान दें, हाथ साफ कर भोजन करें

- तले, भूने, मसाला का अधिक सेवन न करें



- सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें

- ताजा सुपाच्य पौष्टिक भोजन करें



- ताजे मौसमी फल,सब्जी का सेवन करें

- योग व व्यायाम की आदत डालें



- फास्ट व जंक फूड़ का सेवन कम करें

- बच्चों को गंदी जगह व गंदे पानी में खेलने न दें



- छह माह तक के बच्चों को मां का दूध पिलाएं
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