देवरिया। जिला मुख्यालय, कस्बा और चौक-चौराहों पर अस्पताल का धंधा खूब फल-फूल रहा है। जिले में पंजीकृत 95 अस्पताल और क्लीनिक में सिर्फ 42 अस्पतालों के पास फायर एनओसी है। यानी 53 अस्पताल और क्लीनिक बिना मानक पूरे किए ही संचालित हो रहे हैं। वहीं पैथालाॅजी सहित करीब डेढ़ सौ अस्पताल बिना फायर एनओसी और पंजीकरण के ही संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों पर जब कोई घटना होती है तो संचालक ताला बंद कर फरार हो जाते हैं। इतना ही नहीं कई ऐसे अस्पताल संचालक हैं जो आयुर्वेद की डिग्री पर शहर में बड़ा अस्पताल खोलकर ऑपरेशन भी कर रहे हैं।
बीते दिनों एक महिला की मौत के बाद जांच में यह बात सामने आई कि जिस नर्सिंग होम में उसने ऑपरेशन कराया, वह डॉक्टर बीएमएस डिग्रीधारी हैं और धड़ल्ले से अंग्रेजी दवा लिखते हैं। शहर के करीब 15 ऐसे अस्पताल हैं, जहां पर अग्निशमन विभाग की गाड़ी नहीं पहुंच सकती है, इसके बावजूद इनका पंजीकरण हो गया है। नवीनीकरण भी हर साल हो जाता है। अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण का भी इंतजाम नहीं है। इसके अलावा कई अस्पताल तो नक्शे में पार्किंग के लिए चिह्नित बेसमेंट में भी संचालित किए जा रहे हैं जो नियम विरुद्ध है।
बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर ऑन काॅल डॉक्टर बुलाने का झांसा देकर मरीजों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। जब मरीज गंभीर होता है तो गोरखपुर के कुछ अस्पतालों से साठगांठ करके मरीजों का सौदा भी हो जाता है। बृहस्पतिवार को कुछ निजी अस्पतालों की पड़ताल की गई तो न्यू कालोनी स्थित एक निजी अस्पताल का पंजीकरण जिस डाॅक्टर के नाम पर है, वह गोरखपुर निवासी पाए गए। यहां पर एंबुलेंस सेवा में काम करने वाली एक महिला अस्पताल का संचालन करती मिली। रुद्रपुर मोड़ पर एक अस्पताल के बेसमेंट में वार्ड बनाकर चल रहा था। यहां पर कुछ आशा भी मरीजों लेकर आईं थीं। सीसी रोड पर एक अस्पताल में भी कुछ महिला अस्पताल से मरीज कमीशन के चक्कर में लाए गए थे।
उपकरण भी मानकों पर खरे नहीं
अवैध अस्पताल की बात तो दीगर की है, जो पंजीकृत हैं वह भी मानक पर खरे नहीं हैं। कई जगह पर दूसरे डॉक्टर के नाम पर अस्पताल का पंजीकरण कराया गया है। इनके पास पर्याप्त मात्रा में मेडिकल उपकरण नहीं हैं। पैरामेडिकल स्टाफ भी मानक के अनुरूप नहीं हैं। इसके बावजूद इन अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है।
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केस एक- महिला की ऑपरेशन के बाद मौत
रुद्रपुर कोतवाली के बटुलही गांव निवासी अंगिता (38) पत्नी विशुनदेव सोमवार को पथरी का ऑपरेशन कराने के लिए शहर के परमार्थी पोखरा के पास स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचीं। ऑरेशन के बाद उनकी मौत हो गई।
केस नंबर दो-
ऑपरेशन करना था पथरी का, कर दिया बच्चेदानी का
भाटपाररानी थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला का भाटपाररानी नगर के एक चर्चित प्राइवेट नर्सिंग होम में मंगलवार की रात पथरी का ऑपरेशन होना था। रात में जब उसे ओटी में ले जाया गया तो सर्जन ने पथरी का ऑपरेशन करने के बजाय उसके बच्चेदानी का ऑपरेशन कर दिया।
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डीएम ने निजी अस्पताल का रात में किया निरीक्षण, जांच के लिए गठित की समिति
देवरिया। डीएम अखंड प्रताप सिंह और एसपी संकल्प शर्मा ने बुधवार की रात में करीब दस बजे राघव नगर स्थित पल्स हास्पिटल का निरीक्षण किया। डीएम ने अस्पताल के वार्ड और दवा स्टोर के बारे में जानकारी ली। उन्होंने मौजूद कर्मचारियों से बातचीत कर मरीजों से पूछताछ की। मौके पर मौजूद सीएमओ डाॅ. राजेश झा से अस्पताल के पंजीकरण का ब्योरा तलब किया। डीएम ने एसडीएम सदर, सीओ की देखरेख में समिति गठित अस्पताल की जांच कर रिपोर्ट मांगी है। डीएम ने बताया कि निजी अस्पतालों औचक निरीक्षण किया जाएगा। अवैध अस्पताल के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
कोट
अस्पतालों की जांच कराई जाती है। अभी हाल ही में दो अस्पतालों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। जनपद में स्थित अस्पतालों और क्लीनिकों की जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. राजेश झा, सीएमओ