रुद्रपुर (देवरिया)। गोरखपुर के औद्योगिक क्षेत्र का रसायनिक कचरा बहने से काली हुई आमी नदी अब राप्ती नदी को भी प्रदूषित करने लगी है। एक सप्ताह पहले नदी में छोड़े गए जहरीले पानी की वजह से देवरिया जिले में करहकोल गांव के सामने नदी का पानी प्रदूषित होने से मछलियां मरने लगी हैं। राप्ती नदी के प्रदूषित होने से रुद्रपुर के दोआबा क्षेत्र के 52 गांवों के लोगों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो गई है।
राप्ती नदी के पानी से दोआबा क्षेत्र के 52 गांवों में पहले भोजन बनता था। स्नान-पूजा के अलावा सिंचाई में भी इसी पानी का इस्तेमाल होता था, लेकिन प्रदूषण के चलते राप्ती लोगों के लिए चिंता और बीमारी का कारण बन चुकी है। गोरखपुर जिले की ओर से राप्ती में मिलने वाली आमी नदी के प्रदूषित पानी ने हालात और बदतर कर दिए हैं। रुद्रपुर क्षेत्र के करहकोल गांव के पास नदी का पानी काला पड़ गया है, जिससे मछलियां मर रही हैं और नदी का पानी बदबूदार हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर दो महीने पर औद्योगिक इकाइयों का कचरा नदी में छोड़ दिया जाता है। इससे न केवल पानी का रंग बदल जाता है, बल्कि नदी की पूरी पारिस्थितिकी प्रभावित हो रही है। मछलियों की तादाद तेजी से घट रही है। हुन्ना, रोहू, टेंगरा, बरारी और पटया जैसी देशी नस्ल की मछलियां, जो कभी राप्ती की पहचान थीं, अब बेहद कम मिल रही हैं।
नेपाल से निकलकर गोरखपुर होते हुए देवरिया जिले के बरहज में सरयू नदी में मिलने से पहले राप्ती नदी में प्रतिदिन करीब 500 टन नगरीय कचरा और 15 करोड़ लीटर से अधिक अनट्रीटेड सीवेज डाला जा रहा है। इससे नदी के पानी में घुलित ऑक्सीजन की कमी होने लगी है।