तिघरा-मराछी तटबंध पर दबाव
रिटायर्ड बंधे को काटकर आगे बढ़ रही नदी
रुद्रपुर को डुबाने में लगा है बाढ़ खंड : खोखा सिंह
अमर उजाला ब्यूरो
रुद्रपुर। क्षेत्र में हो रही भारी बारिश सिंचाई विभाग के निरोधात्मक कार्यों की बखिया उधेड रही है। गोर्रा और राप्ती नदी पर बने करीब 100 किलोमीटर तटबंध पर हर जगह दरारें नजर आ रही हैं। बंधों के मरम्मत पर लाखों रुपये बर्बाद कर चुका सिंचाई विभाग आग लगने पर कुआं खोद रहा है। मंगलवार को सपा के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह ने तिघरा-मराछी बांध का निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि तिघरा में राप्ती नदी रिटायर्ड बांध को काटकर आगे बढ़ रही है। यहां तेज कटान हो रही है। सिंचाई विभाग रिटायर्ड बांध को बचाने में करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है। गांव को बचाने के लिए बना नया बंधा मरम्मत के अभाव में जगह- जगह टूट गया है। इस बांध पर चार पहिया गुजरना मुश्किल हो गया है। कमोबेश कछार और दोआबा क्षेत्र के सभी तटबंधों का यही हाल है। सिंचाई विभाग इस बार 116 गांवों के डूबने का इंतजार कर रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की दोनों नदियों का जलस्तर रोज बढ़ रहा है। यही हाल रहा तो 1998 की प्रलयकारी बाढ़ की पुनरावृत्ति हो सकती है। उन्होंने कहा कि राप्ती नदी पर तिघरा, भेड़ी, माझानारायण, बनकटी पर कटान होने की पूरी आशंका है। वहीं, गोर्रा नदी पर सिलहटा, जिगिनिहवा, भुसवल के पास कटान हो रही है। उन्होंने आसन्न बाढ़ के खतरे को देखते हुए डीएम में रुद्रपुर क्षेत्र के संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण कर बचाव कार्य तेजी लाने की मांग की। इस दौरान हरेंद्र सिंह त्यागी, अनिल सिंह, अवनीश शुक्ला, महंथ यादव, रामदेव यादव, संतोष यादव, सब्बीर अहमद, अश्विनी, राहुल यादव, रविंद्र सिंह, संतोष यादव, शंभु यादव, रामनिवास यादव आदि मौजूद रहे। इस बाबत एसडीएम संजीव उपाध्याय ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कटान स्थलों पर बचाव कार्य जारी है। बांध कटने नहीं दिया जाएगा।
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सरयू में उमड़ा सैलाब, किसान चिंतित
नदी के जलस्तर में दो दिनों में 50 सेमी का हुआ इजाफा
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू में एक बार फिर सैलाब उमड़ आया है। पिछले दो दिनों में नदी ने 50 सेमी की बढ़त बनाई है। नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। बढ़ते जलस्तर को लेकर तटवर्ती गांवों के किसानों की चिंता बढ़ गई है।
थाना घाट के मीटर गेज पर सरयू नदी पिछले कुछ दिनों से निरंतर बढ़त बना रही है। हालांकि, तीन दिन पूर्व नदी का जलस्तर 66 मीटर से 30 सेमी नीचे बहने लगा था। मंगलवार को दोबारा सैलाब उमड़ने से नदी खतरे के निशान 66.50 से 10 सेमी नीचे 66.40 मीटर पर बह रही है। नदी के उफनाने से कटइलवा, बेलडांड़, नौका टोला, मठियां, कुवाइच टोला आदि गांवों के किसान चिंतित हैं। जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव से कटान तेज हो गई है। नदी रोजाना किसानों की कृषि भूमि निगल रही है। देवेश सिंह, ज्ञान सिंह, जवाहिर यादव, चंदन कुमार आदि का कहना है कि मानसून के दस्तक देने और रोजाना रुक-रुक कर हो रही झमाझम बारिश से नदी बढ़त बना रही है। यही आलम रहा तो नदी का पानी गांवों तक पहुंच जाएगा। इस संबंध में जेई नागेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि नदी बढ़त बना रही है। जलस्तर 66.40 मीटर नोट किया गया है।
मौसम नहीं दे रहा साथ कैसे भरा जाए रेनकट
देवरिया। बारिश और नेपाल की ओर से छोड़े गए पानी से नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। बारिश के कारण तटबंधों पर बने रेनकट को अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है। कटान रोकने के लिए रुद्रपुर, बरहज और भागलपुर में तीन परियोजनाओं पर काम चल रहा था। यह भी अभी तक पूरा नहीं हो सका है। जिम्मेदार मौसम खराब होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। बाढ़ खंड विभाग के एक्सईएन नरेंद्र कुमार जड़िया ने बताया कि तटबंधों की मरम्मत के लिए शासन को पांच करोड़ की डिमांड भेजी गई थी। मात्र एक करोड़ मिला था। तटबंधों की मरम्मत करा दी गई, लेकिन बारिश से दोबारा रेनकट बन गए हैं। इसे भी ठीक कराया जाएगा। नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है, लेकिन अभी चिंता की कोई बात नहीं है। बजट की कमी भी आड़े आ रही है।