100 से अधिक पीड़ितों को होना है करीब एक करोड़ का भुगतान... समाज कल्याण विभाग में लटकी है फाइल
एससी-एसटी वर्ग के पीड़ितों को मदद के लिए शासन से जारी हो चुका है बजट
देवरिया। आपराधिक वारदातों के शिकार अनुसूचित जाति, जनजाति (एससी-एसटी) वर्ग के लोगों को सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता मिलने में देरी हो रही है। 100 से अधिक पीड़ित, समाज कल्याण विभाग का चक्कर लगा रहे हैं। इन्हें करीब एक एक करोड़ रुपये का भुगतान होना हैं। इसमें छेड़खानी, एससी एसटी, दुष्कर्म जैसे मामले भी शामिल हैं। लेकिन विभाग इससे बेखबर है।
अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के लोगों के साथ होने वाली आपराधिक घटनाओं में पीड़ितों और उनके परिजनों को शासन की तरफ से अलग-अलग सहायता राशि दी जाती है। केस दर्ज होने और चार्जशीट दाखिल होने के बाद करीब 45 ऐसे मामलों की फाइल समाज कल्याण विभाग में लंबित है। शासन से बजट जारी होने के बाद भी अभी तक पीड़ितों के बैंक अकाउंट में सहायता राशि नहीं पहुंच सकी है।
केस नंबर एक
गौरीबाजार थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला के साथ मारपीट और छेड़खानी की घटना 24 अक्तूबर 2023 को हुई थी। इन्हें दो लाख रुपये सरकार की ओर से सहायता मिलनी है। केस दर्ज होने के बाद इनकी फाइल पहुंच गई है, लेकिन अभी तक मिलने वाली धनराशि बैंक खातें में नहीं गई है।
केस नंबर दो
तरकुलवा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला के साथ अगस्त 2023 में दुष्कर्म हुआ। पुलिस ने केस दर्ज करने के बाद चार्जशीट दाखिल कर दिया, लेकिन अभी तक महिला को सहायता राशि नहीं मिल सकी है। हालांकि इसकी फाइल समाज कल्याण विभाग कार्यालय तक पहुंच गई है।
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केस नंबर तीन
रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के पिपरा दौलाकदम गांव निवासी जनार्दन प्रसाद के साथ वर्ष 2017 में मारपीट हुई। पुलिस ने मारपीट के अलावा एससी एसटी का केस दर्ज किया। 75 प्रतिशत सहायता राशि मिल चुकी है। सजा के बाद मिलने वाले 25 प्रतिशत धनराशि के लिए कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।
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केस नंबर चार
खामपार थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली किशोरी से छह माह पूर्व छेड़खानी हुई थी। इस मामले में सिर्फ 50 प्रतिशत ही सहायता राशि पीड़ित को मिल सकी है। केस के ट्रायल के दौरान 25 प्रतिशत मिलने वाली धनराशि अभी तक नहीं मिली है। इसके लिए पीड़ित की मां समाज कल्याण विभाग का चक्कर लगा रही हैं।
सामूहिक दुष्कर्म के मामले में आठ लाख की सहायता
एससी एसटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पीड़ित को आठ लाख रुपये मिलते हैं। इसमें मेडिकल रिपोर्ट के बाद एफआईआर दर्ज होते ही चार लाख, आरोपपत्र दाखिल होने पर दो लाख रुपये और कोर्ट का फैसला आने के बाद बचे हुए दो लाख रुपये मिलते हैं।
समझौता के बाद नहीं मिलता है बाकी रकम
आरोपपत्र दाखिल होने के बाद कोर्ट में समझौता हो गया तो बाकी रुपये नहीं मिलता है। हत्या में 8.25 लाख रुपये का प्रावधान है। इसमें पोस्टमार्टम होते ही 50 प्रतिशत रकम मिलती और चार्जशीट दाखिल होने पर बाकी रुपये मिल जाता है। दुष्कर्म में पांच लाख मिलते हैं। आधे रुपये केस दर्ज के बाद, बची हुई आधी रकम चार्जशीट दाखिल होने पर और बाकी 25 प्रतिशत धनराशि सजा के बाद मिलती इस तरह से एक तिहाई रकम पीड़ित को चार्जशीट दाखिल होने तक मिल जाती है।
वर्जन
45 फाइलें आर्थिक सहायता मदद की रूकी हैं। शासन से बजट नहीं मिलने के कारण भुगतान रूका था। यहां की कोई गड़बड़ी नहीं थी। 1.20 करोड़ रुपये शासन से मिला है। पीड़ितों के बैंक अकाउंट में जल्द भेज दिया जाएगा। बाकी पीड़ितों को बजट आने पर भेजा जाएगा। -जैसवार लाल बहादुर, समाज कल्याण अधिकारी
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