70 साल से हो रहे रामलीला पर कोरोना का ग्रहण
भागलपुर। कस्बे के मुख्य बाजार में सात दशक से हो रहे रामलीला पर कोरोना महामारी ने ब्रेक लगा दिया है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने वाली रामलीला के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं मिली। जिससे इस बार रामलीला का मंचन नहीं होगा। इससे कलाकारों के साथ स्थानीय दर्शक भी मायूस हो गए हैं।
कस्बे के मुख्य बाजार में रामलीला सितंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर दशहरा तक चलता था। रामलीला में हिंदू-मुस्लिम एक साथ मिलकर किरदार निभाते हैं। 1950 से इस्लाम मिया हनुमान की तो अनवर मिया रावण की भूमिका 1990 तक निभाते चले आए। वे अब वे नहीं रहे, लेकिन उनकी दी हुई सीख से अहमद अली भरत का किरदार निभाते हैं। वह रामलीला के प्रति अपने आप को इतना समर्पित कर चुके हैं। कलाकारों के संवाद और भेषभूषा अहमद अली ही तय करते हैं। हिंदू और मुस्लिम युवाओं को रामलीला का मंचन करने के लिए प्रेरित करते हैं। शमशाद अली सीता की भूमिका बखूबी निभाते हैं। कोरोना काल में पहली बार प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने से रामलीला नहीं होगी।
रामलीला समिति के ओमप्रकाश पांडेय, दशरथ साहनी, हरिश्चंद्र सिंह, शंभू जायसवाल ने बताया कि कोरोना के कारण रामलीला को करा पाना नामुमकिन है। अगर प्रशासन अनुमति देता भी है तो तैयारी नहीं होने के कारण रामलीला होना मुश्किल लग रहा है। मन में मायूसी तो हैं, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी पहले जरूरी हैं। हर साल रामलीला देखने आने वाले रामप्रसाद जायसवाल कहते हैं कि रामलीला का न होना दुखद है। जिला प्रशासन की मनाही है तो इसका पालन करना भी तो जरूरी है।