नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत नाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव में मंदिर में स्थापित भगवान की प्रतिम
खुखुंदू। जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत नाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव शुक्रवार को बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। दूरदराज से पहुंचे अनुयायियों ने 1008 कलशों से भगवान का जलाभिषेक कर अष्ट द्रव्य से पूजन-अर्चन किया।
इसके बाद 108 घी के दीयों से मंगल आरती हुई। इस दौरान दिनभर मंदिर में जैन अनुयायियों का आना-जाना लगा रहा। मंदिर परिसर में गोष्ठी और भजन गायन का कार्यक्रम भी हुआ।
नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत नाथ का जन्म मगसिर शुक्ला एकम प्रतिपदा के दिन हुआ था। उस समय काकंदी नगरी नाम से यह क्षेत्र सुविख्यात था। महाराजा सुग्रीव और उनकी पटरानी जयरामा के गर्भ से भगवान का जन्म हुआ। तभी से यहां भगवान पुष्पदंत नाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाए जाने की प्रथा शुरू हुई। उसे वर्तमान में समाज के लोग भव्य तरीके से मनाते हैं।
शुक्रवार को भगवान के जन्म कल्याणक महोत्सव पर विभिन्न प्रांतों से पहुंचे जैन अनुयायियों ने सबसे पहले भगवान का पंचामृत अभिषेक किया। जन्म कल्याणक महोत्सव में महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार प्रांतों से बड़ी संख्या में बारी-बारी से पहुंचे अनुयायियों ने दिनभर पूजन-अर्चन किया। प्रबंधक बसंत लाल जैन ने बताया कि जन्म कल्याणक महोत्सव में अयोध्या से पंडित विजय जैन प्रतिष्ठाचार्य, गोरखपुर से पुष्पदंत जैन, रोहित जैन, महावीर जैन, दरौली सिवान बिहार से अविनाश जैन, पूणे महाराष्ट्र से सुशील जैन, विनायक जैन, कोल्हापुर से मनोहर भाई, मध्यप्रदेश जबलपुर से दीपचंद जैन, बंगाल से सुरेश पाटनी सहित यूपी के अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में जैन अनुयायियों का जत्था पहुंचा था। मंदिर परिसर में दिनभर मेला लगा रहा।