फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कृषि मंत्री के जिले में पानी को तरस रहे खेत

Sun, 09 Dec 2018 11:11 PM IST
deoria
विज्ञापन
सिरसिया नहर। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
देवरिया/बरियारपुर। गेहूं की पहली सिंचाई का वक्त आ गया है। किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं, मगर नहरों में पानी ही नहीं है। जिले की अधिकांश नहरें झाड़-झंखाड़ से पटीं हैं। उनमें धूल उड़ रही है। धान की खेती में घाटा झेल चुके किसान शुरुआती दौर में ही सिंचाई की बदहाल व्यवस्था से गेहूं फसल के प्रभावित होने की आशंका से चिंतित हैं। नहरों का यह हाल तब है, जब सूबे के कृषि इसी जिले के हैं और ज्यादातर नहरें भी उसी क्षेत्र में हैं। 
विज्ञापन

कृषि मंत्री के जिले में विभागीय उदासीनता किसानों पर भारी पड़ रही है। सूखे के चलते धान की फसल गंवा चुके किसान गेहूं की फसल बचाने जद्दोजहद में जुटे हैं। धान की फसल सूख जाने पर किसानों ने गेहूं की अगैती बुवाई के लिए खेत तैयार कर लिया। 15 नवंबर तक अधिकांश गेहूं की बुवाई हो भी गई। बुवाई के 21वें दिन बाद से फसल की सिंचाई शुरू हो जाती है। नहर के पास मौजूद किसानों के पास सिंचाई के अपने संसाधन ना के बराबर हैं। वह हमेशा नहर के पानी पर ही निर्भर रहते हैं। विभागीय उदासीनता के चलते खरीफ फसल में दगा देने वाली नहरें रबी फसलों पर भी मेहरबान नहीं हो रहीं। तमाम नहरों की साफ-सफाई का काम अभी भी चल रहा है।  इससे हफ्ते दिन तक पानी मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे।
इनसेट       
यहां बदहाल हैं नहरें       
देसही देवरिया, सिरसिया और द्वारिका तीन प्रमुख रजवाहों में करीब 15 नहर और 60 माइनर हैं। अभी तक किसी भी मुख्य रजवाहे की सफाई नहीं हो पाई है। नहरें झाड़ियों से पटी पड़ीं हैं। पानी आए भी तो अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाएगा। नौतन, माइनर, शाहजहांपुर समेत कई ऐसे माइनर हैं, जिसमें पानी गया ही नहीं। यही हाल गौर रजवाहा के भगडा, पकड़ी, भैसा डाबर, पिपरा, चकिया, गौरकोठी, मुंडेरा, पचरुखिया, बघड़ा, रामपुर शुक्ल,  मुजहना लाला, भुजौली, रामपुर अवस्थी, रामनगर, गुद्दीजोर, हाटा रजवाहा के बरियारपुर नगर पंचायत, सोहनीपार, मेहरौना, बनहरा, बसहवा, बेलवनिया, आमघाट आदि गावों का है। नहरों में पानी नहीं आने के चलते किसान पंपसेट से सिंचाई करने को मजबूर हैं।  
विज्ञापन


सरकारी ट्यूबवेल भी दे गए दगा      
सरकार ने 1974 के करीब विश्व बैंक की मदद से जगह-जगह ट्यूबवेल लगवाए थे। ऑपरेटर भी रखे गए। इससे सिंचाई किसानों को सस्ती पड़ी है। इसमें कुछ ही चल रहे हैं बाकी ज्यादातर बंद हो गए हैं। उनका अस्तित्व भी समाप्त सा हो गया है।

कोट
कई वर्षों से नहर में पानी नहीं आया है। इस समय गेहूं की सिंचाई पंपसेट से कर रहा हूं। क्षेत्रीय विधायक कृषि मंत्री हैं, मगर इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे। 
-ओमप्रकाश पांडेय, गुद्दीजोर।

नहर केवल दिखावा भर का है। वर्षों से नहरें सूखी हैं। यह सिंचाई का समय है। पंपसेट से सिंचाई कर रहा हूं। अभी यह हाल है तो आगे कैसे होगा, इसकी चिंता बढ़ रही है। 
-हेमंत राव, गौरकोठी।
सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित हो इसके लिए सिल्ट सफाई का काम शेड्यूल के मुताबिक 15 दिसंबर तक होने हैं। मैने आज पड़री व पिपरपांती में सिल्ट सफाई का निरीक्षण किया है। जो खामियां मिली हैं उससे एक्सईएन को अवगत करा दिया है। नहरों में जहां तक पानी आने की बात है यह नेपाल से भी तय होता है। पानी आने सिल्ट सफाई बाधा नहीं होगी।
विज्ञापन

- राजेश कुमार त्यागी सीडीओ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें