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फोटोनगर पालिका परिषद क्षेत्र में बढ़ गए हैं रास्ते के विवाद, नक्शे में दिखाया रास्ता, लेकिन रास्ते की जमीन की भी कर दी रजिस्ट्री
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बड़े शहर के रूप में आकार ले देवरिया नगर पालिका परिषद क्षेत्र में जमीन के धंधेबाजों ने बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। प्लॉटिंग में रास्ते की जमीन भी रजिस्ट्री करने के गलत तरीके का नतीजा है कि रास्ते के विवाद बढ़ रहे हैं।
गांव से आकर शहर में बसने वाले लोगों ने पहले आलीशान इमारतें बना लीं। लेकिन, उनके दरवाजे तक चार पहिया वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। रास्ते के लिए लोग शिकायत कर रहे हैं तो पड़ोसियों से दुश्मनी भी बढ़ रही है। रास्ते की दिक्कतों से राजस्व विभाग और नगर पालिका परिषद के अधिकारी भी परेशान नजर आ रहे हैं। रास्ते की शिकायतों पर प्रशासन कार्रवाई कर रहा है। लेकिन, जो शिकायतें हुईं हैं, उनमें बहुत कम मामले में प्रशासन रास्ता निकाल पाया है।
जमीन के धंधेबाजों ने रास्ते की जमीन बेची है, जबकि नगरीय विकास अभिकरण ने भी नक्शा का पालन कराने की जिम्मेदारी नहीं निभाई है। कागज में रास्ता है, लेकिन मौके पर वहां दीवार खड़ी कर दी गई है। ज्यादातर रजिस्ट्री में दो प्लाॅट पर मकान बनाने वालों से छह-छह फीट रास्ता छोड़ने की शर्त लिखी गई। नक्शे में भी इसे दर्शाया गया है, जबकि रास्ते की जमीन को खरीदारों ने अपनी सहूलियत के अनुसार छोड़ा है।
जहां रास्ते के लिए 12 फीट जमीन छोड़ी गई है, वहां भी नाली और बिजली के खंभे लगाने के बाद करीब 8-9 फीट जगह बच रही है। इसमें एक साथ दो वाहन नहीं निकल सकते हैं। इसके साथ ही दूसरी समस्या है कि एक पक्ष ने छह फीट रास्ता छोड़ा तो दूसरे पक्ष ने दो या चार फीट ही जगह छोड़ी है।
अधिवक्ता ने बताया कि प्लॉटिंग के बाद नक्शे में रास्ते की जमीन नगर पालिका परिषद को समर्पित करनी चाहिए, भले ही रास्ते की जमीन की कीमत जमीन बचे वाले ने खरीदार से ले ली हो। नगर पालिका परिषद की जेई निर्माण पूजा शुक्ला ने बताया कि शहर में रास्ते के विवाद अधिक हैं। उन्होंने बुधवार को ही रास्ते का एक विवाद सुलझाया।
अंडरग्राउंड नाली बनाने की जरूरत
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रामनाथ देवरिया के रहने वाले अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने बताया कि पूरे शहर में ज्यादातर रास्ते 12 फीट के ही हैं। नाली दिखाते हुए बताया कि 12 फीट में सड़क, लोगों के घरों की सीढ़ी और बिजली के खंभे भी हैं। ऐसी स्थिति में किसी के घर के पास दोपहिया खड़ा हो गया तो चार पहिया वाहन निकलने में मुश्किल आती है। आबादी घनी हो गई है। नाली की क्षमता कम हो गई है। इस कारण घरों से पानी निकलता है तो सड़क पर नाली का पानी बहने लगता है। शहर में अंडरग्राउंड नाली बनाने की आवश्यकता है, जबकि सड़क पर किसी प्रकार अतिक्रमण नहीं होना चाहिए।
मैं गांव छोड़कर शहर में आ गया, लेकिन अब लगता है कि गांव ही अच्छा था। पूरे शहर में लोगों ने जमीन खरीदकर मकान बनवाया, लेकिन रास्ते की बड़ी समस्या है।
-शेषमणि तिवारी, पूर्व प्रधान, वार्ड नंबर 28
नक्शा देखिए और रास्ता भी
रामनाथ देवरिया में रहने वाले रिटायर्ड पोस्ट मास्टर विद्याधर मिश्र ने नक्शा दिखाया कि जहां नक्शा में 30 फीट रास्ता है, वहां चार पहिया नहीं निकल सकता है। नगरीय विकास अभिकरण की ओर से नक्शा का पालन कराया जाए तो रास्ता बंद नहीं होता।
दो करोड़ का घर बनाया, दुल्हन आई पैदल
शहर में उनके घर की कीमत करीब दो करोड़ रुपये होगी। लेकिन, बहू को घर तक पैदल आना पड़ता है। रिश्तेदार चार पहिया से आते हैं तो घर तक नहीं आ पाते हैं। 15 सालों से रास्ता नहीं मिल पाया। गांव का घर सड़क के किनारे है।
-फूल कुमारी देवी, रामनाथ देवरिया
हमने तो छोड़ा पूरा रास्ता
रामनाथ देवरिया ही नहीं, पूरे शहर में रास्ते की बड़ी समस्या है। मैंने घर बनाया तो साढ़े छह फीट रास्ता छोड़ा, जबकि पड़ोसी ने ढाई फीट ही जगह छोड़ी है। जमीन की प्लॉटिंग करने वालों पर प्रशासन को सख्ती बरतनी चाहिए।
-रामदयाल यादव, वार्ड नंबर 28
वार्ड में मुश्किल से बनी सड़क
रास्ते के लिए कम और पर्याप्त जमीन छोड़ने के विवाद में वार्ड में एक सीसी सड़क का काम रुक गया था। किसी तरह समझौता हुआ तो बन पाई। वह भी सड़क महज आठ फीट है। मैंने रास्ता छह फीट छोड़ा, लेकिन पड़ोसी को कम जगह छोड़ने के कारण दिक्कत हो गई।
-बबिता मिश्रा, वार्ड नंबर 28
शहर में रास्ते के विवाद सुलझाए जा रहे हैं। नक्शा के अनुसार रास्ता न छोड़ा गया हो या बिना नक्शा के बने मकान के कारण रास्ते पर अतिक्रमण हुआ हो तो लोगों को शिकायत करनी चाहिए। जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
-विपिन कुमार द्विवेदी, एसडीएम सदर