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Deoria News: चार सब स्टेशन अधर में, इस बार भी गर्मी में छूटेगा पसीना

Sat, 24 Feb 2024 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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राघव नगर मुहल्ले में बिजली के पोल पर केबिल का लगा मकड जाल।संवाद
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गर्मी में शहर में 400 एसी चलने पर ओवरलोड होगा सिस्टम
ओवरलोड ट्रांसफाॅर्मर और जर्जर तारों के कारण होती है दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर के लोगों को इस बार भी गर्मी में बिजली विभाग की अधूरी तैयारियों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। बिजली निगम ओवरलोड ट्रांसफाॅर्मर और जर्जर तारों के मकड़जाल की व्यवस्था सुधार नहीं पाया है। जबकि चार नए विद्युत सब स्टेशनों का काम भी पूरा नहीं हो पाया है।
बिजली विभाग के जानकारों काे भी आशंका है कि भीषण गर्मी में जब शहर में 400 से अधिक घरों-दफ्तरों में एसी चलेगा तो ओवरलोड से बिजली व्यवस्था चरमराने लगेगी। कुछ घरों में एसी चलेगा तो कुछ परिवारों के लोगों को पंखे की हवा भी नहीं मिलेगी।
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शहर में भटवलिया, रामलीला मैदान, बरियारपुर और पुरवा सहित कई मोहल्लों के लोगों को गर्मी से पहले ही ट्रिपिंग का टेंशन दर्द देने लगा है। जब ओवरलोड होता है तो लो वोल्टेज के कारण बल्ब से लालटेन जैसी रोशनी मिलती है।
ठंड का मौसम बीतने को है और गर्मी ने दस्तक दे दी है। शहर में सुचारु रूप से 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का दावा हवा-हवाई साबित होगा।
शहरवासियों को विद्युत आपूर्ति बहाल करने के लिए चार उपकेंद्र बनाए गए हैं। परंतु मांग के अनुरूप शहरवासियों को आपूर्ति नहीं मिल पाती है। शहर में 10-10 एमवीए के चार नए उपकेंद्र खोलने का प्रस्ताव मिला। लेकिन, अब तक सिर्फ जमीन पैमाइश का कार्य ही पूर्ण हो सका है।
विभाग का दावा है कि उपकेंद्र सुचारु रूप से वर्ष 2024-25 में कार्य करने लगेगा। लेकिन, इस गर्मी में ये सब स्टेशन नहीं बन पाएंगे। यही स्थिति सलेमपुर व गौरीबाजार फीडर की है। यहां भी चार नए विद्युत उपकेंद्र का निर्माण होना है। परंतु अब तक कार्य नहीं शुरू हो सका है।
इधर, निगम ने फरवरी माह में सौ केवीए से ऊपर के ट्रांसफाॅर्मरों की जांच कर कमियों को दूर किया है। ताकि गर्मी के मौसम में परेशानी का सामना न करना पड़े। परंतु विभाग का दावा हवा-हवाई साबित होता नजर आ रहा है।

66 करोड़ की लागत से आठ विद्युत उपकेंद्रों का होगा निर्माण
अब तक सिर्फ जमीन पैमाइश का कार्य पूरा
देवरिया। जिला मुख्यालय के अलावा सलेमपुर व गौरीबाजार के उपभोक्ताओं को ओवरलोड, ट्रिपिंग व लो-वोल्टेज की समस्या से निजात दिलाने के लिए करीब 66 करोड़ की लागत से आठ नए विद्युत उपकेंद्र बनाए जाने हैं।
बता दें कि एक उपकेंद्र के निर्माण में करीब आठ करोड़ की लागत लगती है। जिला प्रशासन ने चिह्नित स्थान के आसपास भूमि आवंटित करने की मांग की। मांग के अनुरूप बिजली निगम ने भूमि की पैमाइश कर जिला प्रशासन को इसकी सूचना मुहैया करा दी। परंतु इस वर्ष नए उपकेंद्र का निर्माण कार्य संभव नहीं दिख रहा है। बिजली निगम की मानें तो यह वर्ष 2024-25 में सूचारु रूप से कार्य करना प्रारंभ कर देगा।
जिले में मौजूद 41 विद्युत उपकेंद्रों से लोगों को बिजली मिलती है। गर्मी के मौसम में कई फीडरों में उपभोक्ता की संख्या अधिक होने के चलते ओवरलोड रहता है। इसके चलते फीडर को बंद कर देना पड़ता था। इस समस्या को देखते हुए निगम की ओर से आठ नए उपकेंद्र बनाए जाने थे। परंतु अभी तक जमीन पैमाइश का कार्य ही हो पाया है। इस वर्ष भी उमस भरी गर्मी से शहरवासियों को निजात नहीं मिलने वाली है।

यहां बनाए जाने हैं नए विद्युत उपकेंद्र
बिजली निगम ने नए विद्युत उपकेंद्र बनाने के लिए जिले में आठ जगह चिह्नित की है। इसमें शहरवासियों को ओवरलोडिंग और ट्रिपिंग जैसी समस्या से निजात दिलाने के लिए चार तो सलेमपुर में तीन व गौरीबाजार में एक नया विद्युत उपकेंद्र बनने के लिए जमीन चिह्नित की गई। देवरिया शहर के लिए शहर के कतरारी, मुंडेरा बुजुर्ग, गुद्दीजोर और पिपरपाती में नए विद्युत उपकेंद्र बनाने हैं। इसी तरह सलेमपुर के लिए घांटी, बैकुंठपुर, नवलपुर और गौरीबाजार के पांडेय माझा में भी नए विद्युत उपकेंद्र बनने हैं।

शहर में टूटे पोल और तारों का मकड़जाल
शहर में ओवरलोड ट्रांसफॉर्मरों के साथ टूटे हुए पोल और जर्जर तारों का मकड़जाल है। यदि सब स्टेशन बन जाते तो फीडरों की संख्या बढ़ती और ट्रांसफाॅर्मरों का लाेड भी बंट जाता। लंबी लाइनों का खामियाजा यह है कि जब बिजली जाती है तो लंबे क्षेत्र की बिजली काटकर मरम्मत कार्य किया जाता है। जानकारों के अनुसार, तारों की मियाद 25 साल होती है। जबकि शहर में 40 साल से अधिक पुराने तारों के सहारे बिजली दौड़ाई जा रही है।
अमर उजाला की टीम ने शनिवार को पड़ताल की तो लचर व्यवस्था दिखी। रामलीला मैदान से हनुमान मंदिर रोड, राघवनगर और मालवीय रोड के किनारे तारों का मकड़जाल दिखा। जहां वाहनों को आने-जाने पर तारों से चिंगारी निकलने लगती है। फॉल्ट हो जाए तो तारों के बीच फॉल्ट वाला तारा ढूंढने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
बिजनेस प्लान के तहत 20 करोड़ रुपये की लागत ट्रांसफाॅर्मर की क्षमता वृद्धि और जर्जर तार बदलने का कार्य चल रहा है। शहर के विभिन्न मोहल्ले के जर्जर तार बदलने के लिए आरडीएसएस स्कीम से कार्य कराया जा रहा है। यह लगभग 60 प्रतिशत पूर्ण हो गया है। नए सत्र के लिए 2024-25 के लिए नए बिजनेस प्लान में 20 करोड़ का नया काम प्रस्तावित किया जा रहा है।

कोट
गर्मी के मौसम में शहरवासियों को निजात दिलाने के लिए विभाग पूरी तरह से जुटा है। ट्रांसफॉर्मर की क्षमता वृद्धि के साथ-साथ जर्जर तारों को बदलने का कार्य हो रहा है। बिजनेस प्लान और आरडीएसएस स्कीम के तहत ये कार्य कराए जा रहे हैं। इस गर्मी में उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। शहर के लिए प्रस्तावित चार नए विद्युत उपकेंद्र बन जाने के बाद इस समस्या से पूरी तरह से निजात मिल जाएगी।
-वीके सिंह, अधिशासी अभियंता, देवरिया

यह कहते हैं शहरवासी
गर्मी में शहर की बिजली आपूर्ति भगवान भरोसे रह जाती है। ओवरलोड के चलते कब बिजली चली जाए, यह कोई नहीं जानता। बिजली चले जाने के बाद लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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-उमेश मिश्र, भटवलिया

शहर में विभाग 24 घंटे बिजली देने का दावा करता है परंतु गर्मी के मौसम में उसका दावा फेल हो जाता है। मोहल्ले में ओवरलोड के चलते फाॅल्ट व ट्रिपिंग की समस्या गर्मी में काफी देखने को मिलती है। मोहल्ले में लगे विद्युत पोल पर तारों का मकड़जाल होने की वजह से उसे ठीक करने में लाइनमैन परेशान हो जाते हैं।
-अजीत सिंह, भटवलिया
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