रुद्रपुर। सावन माह के पहले दिन बृहस्पतिवार को दुग्धेश्वरनाथ मंदिर में कांवड़ियों की भीड़ उमड़ेगी। शिवभक्त शिवलिंग पर सरयू नदी के जल से जलाभिषेक करेंगे।
मेले के लिए मंदिर को सजा दिया गया है। मंदिर की सफाई व्यवस्था के लिए विशेष टीम लगाई गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है।
नगर पंचायत प्रशासन की ओर से मंदिर के दक्षिणी द्वार पर दो तरफ से त्रिस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है। महिलाओं और पुरुषों की लाइन अलग-अलग रहेगी।
महिलाएं पूरब की ओर से दक्षिणी दरवाजे से मंदिर परिसर में प्रवेश करेंगी। पुरुषों की लाइन विष्णु मंदिर के सामने से लगवाई जाएगी। मेला परिसर में दुकानें सज गई हैं।
नगर पंचायत प्रशासन मेला क्षेत्र से लेकर पूरे नगर में पथ प्रकाश की व्यवस्था दुरुस्त कर दी है। दुग्धेश्वरनाथ के मंदिर को बिजली की झालरों से सजा दिया गया है।
मंदिर के महंत विजय शंकर ने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए रात 12 बजे के बाद मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे।
दर्शन के लिए मंदिर परिक्षेत्र में ठहरे बड़ी संख्या में श्रद्धालु सबसे पहले जलाभिषेक करेंगे। बरहज से सरयू नदी का जल भरकर करीब 22 किमी की पैदल यात्रा कर कांवड़िए शिवलिंग पर जल चढ़ाने आते हैं। खुखुंदू संवाद के अनुसार मठिया शिवालय पर सावन माह भर बड़ी संख्या में शिवभक्तों का रेला उमड़ेगा। वैसे तो यहां प्रत्येक शुक्रवार और सोमवार को भी दूरदराज से शिवभक्त भोलेनाथ का पूजन-अर्चन करने पहुंचते है।
लेकिन बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे सावन में यहां मेले जैसा दृश्य हो उत्पन्न हो जाएगा। पूरे माह भर भोलेनाथ को जलाभिषेक करने के लिए भोर से ही अलग-अलग लंबी लाइनों में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं का ताता लगा रहता है।
शिव मंदिर मठिया में तीन अलग-अलग मंदिरों और दो चबूतरे पर शिवलिंग स्थापित है। मंदिरों की मोटी-मोटी दीवार और उसपर बने चित्र प्राचीनता को दर्शाते है।
सावन में मंदिर परिसर में रोजाना आसपास के चालीस-पचास गांवों और दूरदराज से बड़ी संख्या में शिवभक्तों का रेला आता है।