प्रतापपुर चीनी मिल 44 दिन चलने के बाद शुक्रवार की भोर में चार बजे बंद हो गई। लेकिन चीनी मिल की ओर से किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान में देरी की जा रही है। अभी तक महज 1.73 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। चीनी मिल पर 28 करोड़ से अधिक रुपये बकाया हैं। फिलहाल, चीनी बेचकर गन्ना मूल्य भुगतान का आदेश डीएम की ओर से दिया गया है।
प्रतापपुर चीनी मिल ने पांच जनवरी को पेराई शुरू की। चीनी मिल ने अबतक जिले के किसानों का 1.73 लाख क्विंटल गन्ना की पेराई की है। जिसका 230 रुपये की दर से मूल्य करीब 30 करोड़ रुपये हुआ। शासन के नियमों के मुताबिक 14 दिन के भीतर चीनी मिल को बकाया मूल्य का भुगतान 230 रुपये की दर से करना होता है।
बाकी रकम को तीन-तीन महीने के अंतराल पर देने का नियम है। लेकिन चीनी मिल प्रशासन पर शासन के आदेश का कोई असर नहीं दिख रहा है। इस हिसाब से चीनी मिल को शुक्रवार तक 21.53 करोड़ रुपये का भुगतान कर देना चाहिए था लेकिन चीनी मिल की तरफ से पांच, छह और सात जनवरी का महज 1.73 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसको लेकर गन्ना किसानों में नाराजगी है।
बतादें कि चीनी मिल प्रशासन ने कई साल से घाटा होने का हवाला देकर मिल चलाने से इन्कार कर दिया था। काफी जद्दोजहद के बाद प्रतापपुर चीनी मिल ने पेराई शुरू की। चीनी मिल प्रशासन ने बिहार के सिवान और गोपालगंज जिले का गन्ना लेने से इन्कार कर दिया था। इस बाबत जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम ने बताया कि चीनी मिल प्रशासन को बकाया गन्ना मूल्य चीनी बेचकर भुगतान करने का आदेश दिया गया है। गन्ना किसानों के भुगतान के लिए प्रशासन सजग है।