एक तरफ स्वच्छ भारत अभियान के जरिए गांवों में शौचालय निर्माण पर जोर दिया जा रहा है तो दूसरी तरफ शौचालयों का धन जिम्मेदार हजम कर रहे हैं।
ऐसा ही मामला भलुअनी ब्लॉक के फतेहपुर गांव में जांच के दौरान उजागर हुआ है।
सीडीओ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन तत्कालीन प्रधान और सेक्रेटरी के खिलाफ गबन और सरकारी कार्य में बाधा का केस दर्ज करने की तहरीर मदनपुर थानाध्यक्ष को भेजा है।
सीडीओ कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने बताया कि फतेहपुर गांव में वित्तीय वर्ष 2014-15 में विश्व बैंक सहायतित नीर निर्मल परियोजना के तहत स्वच्छ शौचालयों का निरीक्षण का निर्देश दिया गया था।
डीपीआरओ कार्यालय के जिला कंसलटेंट राजेश यादव के जांच में पता चला कि वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद भी सुभाष, रामदुलारी, लक्ष्मीना, अशोक, हरीनारायण आदि के शौचालय अधूरे हैं।
जबकि डीपीआरओ कार्यालय ने पूरी धनराशि ग्राम पंचायत के खाते में भेज दी है।
ग्राम पंचायत के बैंक खाते ग्राम निधि छह का संचालन संयुक्त रूप से ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की ओर से किया जाता है।
दोनों व्यक्ति धन की निकासी कर लाभार्थी को उपलब्ध कराते हैं। लाभार्थी को पूरी धनराशि समय से उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दोनों की है।
गांव के लोगों ने जांच अधिकारी को बताया कि पूर्व प्रधान की ओर से बनवाए गए कोई भी शौचालय पूरा नहीं करवाए गए हैं।
इसके अलावा अंत्येष्ष्टि स्थल बनाने के लिए मिले धन को निकाल लिया गया लेकिन निर्माण नहीं कराया गया।
इस सरकारी धन के गबन के प्रकरण में तत्कालीन ग्राम प्रधान चिंता देवी और सेक्रेटरी रविंद्र प्रताप शाही संयुक्त रूप से दोषी हैं।