नीलांबुज मिश्र
सलेमपुर। देवरिया में बिजली उत्पादन केंद्र बनेगा। शासन के पहल पर इसकी कवायद शुरू हो गई है। नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन (एनटीपीसी) की ओर से तय मानक के अनुसार प्रशासन ने 1500 एकड़ जमीन की तलाश सलेमपुर के महाल मंझरिया गांव में कर लिया है। घाघरा और छोटी गंडक नदी के दोआबा में है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो आगे की कार्रवाई बहुत जल्द शुरू हो जाएगी।
बिजली की समस्या से निजात के लिए एनटीपीसी ने 660 मेगावाट का तीन तापीय विद्युत परियोजना स्थापित करने के लिए 1500 एकड़ जमीन मांगी है। इसके लिए शासन ने मानक का हवाला देते हुए डीएम से रिपोर्ट मांगा है। सर्वे के बाद तहसील प्रशासन ने महाल मंझरिया गांव का चयन किया है। इस गांव का रकबा करीब दस हजार एकड़ में फैला है। नदी की रेत पर बसे इस गांव में छिटफुट आबादी है जो खेती के उद्देश्य से अस्थायी झोपड़ी में लोग रहते हैं। यहां के अधिकांश किसान बलिया और बिहार, सिवान जिले के निवासी हैं।
चिन्हित स्थान की दूरी राष्ट्रीय राज्यमार्ग सोनौली-देवरिया व बलिया मार्ग से 15 किलोमीटर और रामजानकी मार्ग से मात्र पांच किलोमीटर दूरी है। वहीं भटनी-वाराणसी रेलखंड पर स्थित तुर्तीपार रेलवे स्टेशन से 14 किलोमीटर की दूरी है। यहां पर कोई भी राष्ट्रीय पार्क, सेंचुरी, हाथी, शेर एवं रिजर्व फारेस्ट माइग्रेटी रूट 10 किलोमीटर की एरिया में नहीं है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से चिन्हित स्थान सभी मानकों को पूरा कर रहा है। अफसरों की माने तो अगर परियोजना चालू होने से पूर्वांचल में नासूर बनी बिजली की समस्या से निजात मिल जाएगी। एसडीएम आरपी तिवारी ने बताया कि जो जमीन चिन्हित की गई है। वह मानकों को पूरा कर रहा है। किसानों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलेगा। यहां पर सिर्फ एक फसली खेती होती है। इस लिए इस स्थान का चयन किया गया है। इसकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है।