पिड़री गांव के समीप बोरियों में मिट्टी डालकर गोर्रा नदी से कटान रोकने की तैयारी
गोर्रा नदी के वेग को रोकने के लिए सिंचाई विभाग बोरी में मिट्टी डालकर बंधे के किनारे लगा रहा है। ऐसे में नदी का जलस्तर बढ़ने पर बचाव कार्य पूरी तरह से अक्षम साबित होंगे। पिड़रा भुसउल बांध पर कटान रोकने के लिए विभाग की तैयारी महज कोरम दिखाई पड़ रहा है। यदि बंधा कटा तो इस बार पिड़री गांव का अस्तित्व मिट जाएगा।
गोर्रा नदी के तट पर छह किलोमीटर लंबा पिड़रा भुसउल बांध पर नदी जिगिनहवा मोड़ के पास खतरनाक ढंग से कटान करती चली आ रही है। नदी धीरे धीरे पिड़री गांव के समीप तक पहुंच गई है। गांव के किसानों की करीब सौ बीघा खेती करने योग्य भूमि पहले ही नदी के कटान से बर्बाद हो चुकी है। करीब बारह मीटर चौड़े बांध को नदी ने काटा तो पिड़री गांव नदी की धारा में बह जाएगा।
विभाग इस गांव को बचाने के लिए बंधों के किनारे बोरियों में मिट्टी डालकर लगा रहा है। जलस्तर बढ़ने पर बोरी में रखी गई मिट्टी गलने लगती है। गांव वालों के अनुसार बोरी में बालू रखकर कटान रोकना बेहतर होता है। बंधों पर जगह जगह रेनकट़्स और रैटहोल पड़े हुए है। पिड़रा भुसवल बांध कटने पर पचास गांवों के अलावा गोर्रा नदी का पानी वर्ष 1998 में रुद्रपुर कस्बा तक पहुंच गया था। बाढ़ की आपदा को लेकर सिंचाई विभाग की खानापूरी की तैयारी को देखकर गांव वालों में नाराजगी है।