पूर्व मंत्री के जनाजे में उमड़ा जनसैलाब
लार। गंभीर बीमारी से जूझ रहे पूर्वमंत्री एमए लारी (72) के निधन की खबर मिलते ही लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार को भोर में इनका लखनऊ से शव लारी हाउस पर पहुंचा। अंतिम दर्शन के लिए दरवाजे पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। शाम को पांच बजे उनका जनाजा कब्रिस्तान के लिए निकला और सुपुर्दे खाक किया गया।
पूर्व मंत्री एमए लारी होश संभालने के बद से ही सामाजिक कार्यों में रुचि रखते हुए राजनीति में सक्रिय रहे। उनके राजनीतिक कैरियर काफी उतार चढ़ाव रहा। 1977 में आपातकालीन आंदोलन में अहम भूमिका निभाई और 19 माह जेल की सलाखों में रहे। रिहाई के बाद 1985 में जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव में सलेमपुर सीट से चुनाव लड़े। उनका इलाज लखनऊ के राममनोहर लोहिया अस्पताल में चल रहा था। एक सप्ताह से उनकी हालत काफी नाजुक हो गई थी। शुक्रवार की देर शाम अपने लखनऊ आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद के बेटे रंजीत यादव, पूर्व विधायक सुरेश यादव, स्वामीनाथ यादव, बलिराम, पूर्व जिलाध्यक्ष सपा गेंदालाल यादव, पूर्व चेयरमैन श्रीराम सिंह, रविंद्र वर्मा, जगदीश यादव, श्याम बहादुर सिंह, अजय राय, विजय लक्ष्मी गौतम, निर्मल सिंह, बलबीर सिंह, अरुण सिंह आदि ने शोक प्रकट किया।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के रहे करीबी
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर चंद्रशेखर के सबसे करीबी रहे। प्रधानमंत्री आवास में चौबीस घंटे आने जाने की अनुमति सिर्फ पूर्व मंत्री एम ए लारी को मिली थी। इस बात से उनके परिजन प्रधानमंत्री पर नाराज हो गए। तो उन्होंने अपने परिजनों को समझाते हुए कहा कि मकबूल मेरा छोटा भाई है। और इसकी जगह मेरे दिल में है। 1991 में मंत्री की बेटी शबाना लारी की शादी में लखनऊ पहुंच कर वर वधू को आशीर्वाद दिया था। इसके बाद वह पूरी रात उनके परिजनों के साथ शादी कार्यक्रम में मौजूद रहे।