देवरिया। नागरी प्रचारिणी सभा में द्वितीय रविवारीय कवि गोष्ठी रविवार को हुई। इसमें कवियों ने विविध विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर लोगों को खूब गुदगुदाया। एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों पर लोगों ने तालियों के साथ कवियों का उत्साहवर्धन किया। इसकी अध्यक्षता विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुधाकर तिवारी ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ गीतकार दयाशंकर कुशवाहा की वाणी वंदना जय जय जय हे हंस वाहिनी के साथ शुरू हुआ। इसके बाद गीतकार महेश सिंह दीपक ने प्यार बाजार में नीलाम करब त बदनाम हो जाइ, प्यार में जे धोखा करे उ कइसे मन मीत हो जाइ...भोजपुरी गीत सुनाकर सबको आह्लादित कर दिया। नित्यानंद आनंद ने भोजपुरी सान ह आपन, आपन मातृभाषा है इ माई के दूध बतासा है...के द्वारा भोजपुरी क्षेत्र की विशेषता को बताने का प्रयास किया। तत्पश्चात अंजलि अरोड़ा खुशबू ने अपनी गजल हम इश्क वाले इश्क से बेजार नहीं, जर्रा ए आसमां के तलबगार भी नहीं...प्रस्तुत किया। पार्वती देवी गौरा ने अवध नगरिया से वर दुलहा सुनु रे सखियां...विवाह गीत सुनाया। गोष्ठी को गति देते हुए गीतकार दयाशंकर कुशवाहा ने दास्तानें दिले राज बताए नहीं जाते...गजल से गोष्ठी को ऊंचाई दी।
इसके बाद क्षमा श्रीवास्तव ने छोड़ बाबुल का आंगन पराई हुई जाने कैसी ये विदाई हुई...गीत के द्वारा एक बेटी की पीड़ा उकेरा। फिर प्रार्थना राय ने वो प्यार की लौ फिर से जलानी है, बीती हुई हर बात दिल से सुनानी है...प्रस्तुत किया।