खिलाड़ियों को सात साल से छात्रावास का इंतजार
देवरिया। वर्ष 2012 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने देवरिया में क्रिकेट व वालीबॉल का छात्रावास आवंटित किया, उसके बाद से ही यहां रहने वाले प्रदेश भर से चयनित खिलाड़ियों को अपने आवासीय भवन का इंतजार है। छात्रावास भवन न होने से खिलाड़ी डायमेट्री के ऊपर बने बैडमिंटन व टेबल टेनिस हाल में रहने को विवश हैं। एक ही कमरे में कई खिलाड़ियों को रखे जाने से उन्हें परेशानी हो रही है। देवरिया छात्रावास को पिछले सात साल से अपने भवन का इंतजार है।
गोरखपुर के निवर्तमान सांसद रहे योगी आदित्यनाथ जब प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो वहां के क्षेत्रीय क्रीड़ागण राष्ट्रीय स्तर का तरणताल, कबड्डी हाल व अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित जिम बन गया। अब मानबेला में अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम भी बनने जा रहा है। गोरखपुर मंडल का जिला होने के कारण खेल क्षेत्र के विकास में उच्चाधिकारियों की नजर इस जिले पर नहीं हो रही है, और न ही यहां के जनप्रतिनिधि खेल छात्रावास के लिए प्रयास करते रहे हैं। छात्रावास भवन के अभाव में प्रदेश के विभिन्न जगहों से आए खिलाड़ी यहां के आवासीय व्यवस्था को लेकर नाखुश रहते हैं।
छात्रावास में 40 खिलाड़ी
क्रिकेट में 25 और वालीबॉल में 15 खिलाड़ियों का छात्रावास में कोटा है। दोनों खेलों के छात्रावास को मिलाकर कुल 40 खिलाड़ियों को खेल निदेशालय की ओर से प्रतिदिन रहने, खाने, पढ़ने व चयनित एनआईएस डिप्लोमा प्राप्त प्रशिक्षक की देखरेख में खेल का निर्धारित मानकों के अनुसार सुबह व शाम प्रशिक्षण कराया जाता है। बेहतर प्रशिक्षण व पोषण के लिए खिलाड़ियों पर वर्तमान में सरकार की ओर से प्रतिदिन 250 रुपए व्यय किया जाता है। यहां रहने वाले खिलाड़ियों का चयन हर साल जिला, मंडल व स्टेट ट्रायल के आधार पर किया जाता है।
ट्रिपल स्टोरी छात्रावास भवन के लिए 2.34 करोड़ रुपए का निर्माण यूपीपीसीएल से प्रस्ताव बनाकर खेल निदेशालय को भेजा गया है। इसे मंजूरी मिली तो यहां भी छात्रावास भवन होगा। भवन होता तो स्टेट प्रतियोगिताओं के समय बाहरी टीमों को भी यहां ठहराने में दिक्कत नहीं आती।
केके पांडेय, जिला क्रीड़ाधिकारी